जेल में आजम खान से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव, बोले- उनके परिवार के साथ हुआ अन्याय

लखनऊः समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल में पार्टी के महासचिव और संस्थापक सदस्य आजम खान से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान समाजवादी पार्टी के लिए पहले भी महत्वपूर्ण थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। इस दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आजम खान और उनके परिवार के साथ अन्याय किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तार

Written By :

SK Sharma

Updated

October 22, 2026

akhilesh-azam

लखनऊः समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल में पार्टी के महासचिव और संस्थापक सदस्य आजम खान से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान समाजवादी पार्टी के लिए पहले भी महत्वपूर्ण थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। इस दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आजम खान और उनके परिवार के साथ अन्याय किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने आजम खान के साथ पार्टी के पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे। किसी भी राजनीतिक परिवार ने उतना अन्याय नहीं झेला, जितना आजम खान साहब के परिवार ने झेला है।” सपा प्रमुख के इस बयान को पार्टी में आजम खान के राजनीतिक महत्व और रामपुर के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित अन्याय के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि आजम खान को कई साल जेल में बिताने पड़े और उनके परिवार को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, अखिलेश यादव के ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित मामलों में कानूनी तथ्यों और न्यायिक निष्कर्षों को अलग से देखना आवश्यक है। भाजपा की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने शिक्षा और विश्वविद्यालयों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को शिक्षा और ज्ञान से कोई खास सरोकार नहीं है और वह उन विश्वविद्यालयों की भी पर्याप्त चिंता नहीं करती, जो युवाओं का भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आजम खान के परिवार के साथ हुआ अन्याय

अखिलेश यादव ने कहा कि न्याय मिलने में समय लग सकता है, लेकिन सच्चाई को स्थायी रूप से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमों में इतनी ताकत नहीं होती कि किसी व्यक्ति को हमेशा जेल में रखा जा सके। उनके मुताबिक, समय के साथ सच्चाई सामने आती है और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कथित तौर पर साजिश करने वालों को जवाब देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को समाज, देश और कानून के सामने अपनी जिम्मेदारी का जवाब देना होगा। अखिलेश यादव ने अपने बयान में न्याय, राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आजम खान के मामले को पार्टी और उसके समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

रामपुर की जनता से भावनात्मक रिश्ता

आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का रामपुर की जनता से संबंध केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि भावनात्मक भी है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के साथ पार्टी के पुराने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए इसे पारिवारिक रिश्ते जैसा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति सम्मान देता है, उसके सम्मान का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने आपसी विश्वास और सम्मान को राजनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। रामपुर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आजम खान इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की यह मुलाकात पार्टी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव पर हुई चर्चा

मुलाकात के दौरान हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश यादव ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबी चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव और उससे संबंधित तैयारियां बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल थीं। सपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव को लेकर सहयोगी दलों की एक सूची तैयार की गई है। इस सूची पर चर्चा हुई और वह उसे अपने साथ लेकर आए हैं। हालांकि, अखिलेश यादव ने सूची में शामिल दलों के नामों या संभावित गठबंधन की विस्तृत रणनीति का खुलासा नहीं किया। इसलिए आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी किन दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है, इस संबंध में अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उनके बयान से इतना जरूर स्पष्ट हुआ कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सहयोगी दलों और राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर रही है।


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