सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिल में कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर प्रशासन ने शनिवार को ध्वस्तीकरण कार्रवाई कर इसे ढहा दिया है। जिला अदालत के उस फैसले के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को अवैध घोषित किया गया था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजर का इस्तेमाल कर अदालत के बेदखली के आदेश को सही ठहराए जाने के बाद ध्वस्तीकरण के निर्णय पर कार्रवाई बढ़ाई है। उधर, कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई को कुछ राजनीतिक गलत ठहरा रहे हैं।
कोर्ट के अंदर बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट का इमारत के संबंध में एक फैसला था। इसके खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है।
मस्जिद कमेटी की अपील हुई थी खारिज
दरअसल, जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर एक निर्माण पाया गया था। इसे अवैध निर्माण बताया गया था। यह जमीन सरकारी है। लिहाजा, इस इमारत को सरकारी न होने पर फैसला सही ठहराए जाने का विवाद था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक आदेश में इसे अवैध बताया था। इसी आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने अपील दायर की थी। उनकी इस अपील को खारिज कर दिया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट के उसी अवैधवाले आदेश को बरकरार रखा गया था।
इसी आदेश के तहत अवैध निर्माण बताकर ध्वस्तीकरण कार्रवाई की जा रही है। डीआईजी अभिषेक सिंह की मानें तो प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण से पहले की लीगल रिस्पॉन्सिबिलिटी पूरी की गई हैं। कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत ही कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार का व्यवधान न हो इसलिए पीएसी और आरएएफ की मौजूदगी बनी रहेगी। दूसरी ओर राजनीतिक हंगामा किया जाने लगा है।
सांसद इकरा हसन को किया गया नजरबंद
कोर्ट के अंदर अवैध इमारत पर कार्रवाई को कैराना की सांसद इकरा हसन इस कार्रवाई को गलत ठहरा रही हैं। उन्होंने ध्वस्तीकरण स्थल तक जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उनको नजरबंद कर दिया था। सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने के लिए सफल नहीं हो सकी हैं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने भी इस कार्रवाई को निंदनीय कहा है। उनका कहना है कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। वह इस कार्रवाई के खिलाफ हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को भी अवैध मस्जिद पर कार्रवाई पसंद नहीं आ रही है। मसूद ने कहा, “देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है।
इमरान ने कहा- जमीन मालिक का नाम बताओं
इमरान ने जमीन के मालिक पर बहस करनी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि खसरा रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया था कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है। उनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी। इमरान मसूद के अनुसार, मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है। मसूद का इशारा सरकार की ओर था कि आपने वक्फ बोर्ड को पार्टी नहीं बनाया। वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है। बहरहाल, अब यह मामला काफी आगे निकल चुका है। सरकार ने अपनी कार्रवाई के तहत अवैध बताई गई इमारत पर बुलडोजर ऐक्शन कर दिया है। कोर्ट ने इसे अवैध बताया था।
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