Bihar Floods: बाढ़ से बिहार में बिगड़े हालात, NH-80 के बाद मुंगेर-मिर्जाचौकी हाईवे भी डूबा

Bihar Floods: बिहार में बाढ़ का असर 14 जिलों में फैल गया है, जिससे लगभग 43.64 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि कई बड़ी नदियों में जलस्तर घटने का रुझान देखा जा रहा है, लेकिन गंडक, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन और घाघरा जैसी कई नदियां अभी भी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ नदियों के जलस्तर और बैराज से छोड़े जा रहे पानी की निगरानी बढ़ा दी है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर,

Written By :

SK Sharma

Updated

September 10, 2026

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Bihar Floods: बिहार में बाढ़ का असर 14 जिलों में फैल गया है, जिससे लगभग 43.64 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि कई बड़ी नदियों में जलस्तर घटने का रुझान देखा जा रहा है, लेकिन गंडक, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन और घाघरा जैसी कई नदियां अभी भी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ नदियों के जलस्तर और बैराज से छोड़े जा रहे पानी की निगरानी बढ़ा दी है।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं। इन जिलों के 85 ब्लॉकों की 527 ग्राम पंचायतों में लगभग 43.64 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि गंडक (डुमरिया घाट पर), कोसी (बलतारा और कुरसेला पर), बागमती (बेनीबाद पर), बूढ़ी गंडक (खगड़िया पर) और गंगा (दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव पर) खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

घाघरा-पुनपुन भी उफान पर

पुनपुन (श्रीपालपुर पर) और घाघरा (दरौली और गंगपुर सिसवन पर) भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गुरुवार सुबह भागलपुर में गंगा का जलस्तर 34.60 मीटर और कहलगांव में 32.81 मीटर पर स्थिर रहा। घाघरा नदी दरौली में 61.49 मीटर के स्तर पर पहुंच गई, जहां जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, बैराज से पानी छोड़े जाने के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार सुबह 8:00 बजे बीरपुर बैराज से कोसी नदी में 1,40,240 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जिसमें पानी घटने का रुझान देखा गया। वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का डिस्चार्ज 86,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसमें बढ़ोतरी का ट्रेंड देखा गया। इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डिस्चार्ज 72,518 क्यूसेक रहा, जिसमें कमी देखी गई। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि राहत कार्यों के तहत राज्य भर में अभी 951 कम्युनिटी किचन चल रहे हैं; इन सुविधाओं के जरिए अब तक लगभग 33.8 लाख लोगों को खाना खिलाया गया है। इसके अलावा, 15 राहत कैंपों में बाढ़ से प्रभावित 11,255 लोगों के लिए रहने, खाने और मेडिकल देखभाल का इंतजाम किया गया है।

राहत-बचाव कार्य के 1,932 नाव उतरे

बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच लगभग 2,57,000 पॉलीथीन शीट और 40,600 सूखे राशन के पैकेट बांटे गए हैं। लोगों को निकालने और आने-जाने में मदद के लिए कुल 1,932 नावें चलाई जा रही हैं, जबकि मवेशियों के लिए 6,692 क्विंटल पशु आहार बांटा गया है। तेजी से राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें तैनात की गई हैं। बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों में कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और एक-दो जगहों पर भारी बारिश का अनुमान लगाया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

भागलपुर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। बाढ़ का पानी जिले की मुख्य सड़कों को एक-एक करके अपनी चपेट में ले रहा है। NH-80 पर पहले से ही यातायात ठप है, और अब हाल ही में बने मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोर-लेन हाईवे पर भी पानी लगभग दो फीट की गहराई तक भर गया है। फोर-लेन हाईवे पर दो अलग-अलग जगहों पर पानी का बहाव बहुत तेज है, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर और राजधानी पटना के बीच सड़क संपर्क किसी भी समय पूरी तरह टूट सकता है।

वैकल्पिक रास्तों के बंद होने का खतरा

NH-80 की हालत पहले से ही बहुत खराब है, जहां मुख्य सड़क पर 3 से 4 फीट पानी बह रहा है। प्रशासन द्वारा कई हिस्सों में आवाजाही रोकने के बावजूद, लोग जरूरी कामों के लिए गहरे पानी से गुजरकर अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। अब, ग्रीनफील्ड फोर-लेन हाईवे पर भी पानी चढ़ने से यह वैकल्पिक रास्ता भी बंद होने की कगार पर है।सड़क पर पानी का बहाव इतना तेज है कि गाड़ियों के बह जाने और बड़े हादसे होने का लगातार खतरा बना हुआ है। अगर गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो फोर-लेन हाईवे पर भी गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ सकती है।

रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी यात्रियों की भीड़

सड़क संपर्क टूटने से भागलपुर से सुल्तानगंज और पटना जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। सड़क संपर्क पूरी तरह कटने के डर से रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है और भागलपुर से गुजरने वाली ट्रेनें पूरी तरह खचाखच भरी हुई चल रही हैं। मौसम विभाग और स्थानीय लोगों के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों में स्थिति और भी खराब हो सकती है, जिससे यह डर पैदा हो गया है कि बाढ़ का पानी भागलपुर शहर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।


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