Uttarakhand Tunnel Collapse: उत्तराखंड के चमोली में चमोली में THDC की विषणुगाड पीपल कोटी जल विद्युत परियोजना की टनल धस गई। इस हादसे में अत तक 7 मजदूरों की मौत की सूचना है। टनल में फंसे लोगों में से अब तक 16 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि टनल में मलबा और पानी के भरने से लगभग 18-19 लोगों के फंसने की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। सूचना मिलने पर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत व बचाव एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। फिलहाल रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है।
शाम करीब 7:05 बजे हुआ हादसा
प्रशासन के अनुसार, घटना की जानकारी शाम करीब 7:05 बजे मिली। निर्माणाधीन टनल (tunnel ) में मलबा और पानी घुसने की खबर मिलने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF और CISF की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। बचाव टीमें टनल के अंदर के हालात को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों की मदद से फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए, राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए सेना, ITBP, NDRF और SDRF की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं। सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। प्रशासन मौके पर जरूरी संसाधन और इंतजाम जुटा रहा है और साथ ही टनल के अंदर के हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।
16 लोगों का किया गया रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने बचाव टीमों और वहां मौजूद अधिकारियों से जानकारी लेकर हालात का जायजा लिया और बचाव कार्य पूरी तेजी और तालमेल के साथ करने के निर्देश दिए। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने को प्राथमिकता देते हुए, जिला मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। जिला प्रशासन के अनुसार, बचाए गए 16 लोगों को मेडिकल जांच और इलाज के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल भेजा गया है। अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम अभी उनकी सेहत की जांच कर रही है। बचाए गए लोगों की सेहत के बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
सीएम धामी ने लिया घटना का संज्ञान
घटना का संज्ञान लेते हुए, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामि ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल के अंदर मौजूद हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है और इसके लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखते हुए घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बचाव कार्य में कोई ढिलाई न बरती जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञ टीमें उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। आपदा प्रबंधन और पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने जिलाधिकारी और आपदा सचिव से बात की और उन्हें बचाव कार्य में तेजी लाने तथा राहत कार्य युद्धस्तर पर करने के निर्देश दिए।
मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी
आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को तेजी से और आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र और जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के माध्यम से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर घटनास्थल पर अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञ टीमें उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन द्वारा सुरंग के अंदर की स्थितियों का आकलन करने के साथ बचाव कार्य आगे बढ़ रहा है।
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