राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामलाः चंपत राय और अनिल मिश्रा को SIT से मिली क्लीन चिट

Ram Mandir : अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार को अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। शुरुआती रिपोर्ट में भी चंपत राय को दोषमुक्त करार दिया गया था। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में गिनती की प्रक्रिया को लेकर अनिल मिश्रा की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया गया था, लेकिन उन्हें सीधे तौर पर आरोपी नहीं बनाया गया था। SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल

Written By :

SK Sharma

Updated

August 18, 2026

Ayodhya Temple Museum

Ram Mandir : अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार को अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। शुरुआती रिपोर्ट में भी चंपत राय को दोषमुक्त करार दिया गया था। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में गिनती की प्रक्रिया को लेकर अनिल मिश्रा की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया गया था, लेकिन उन्हें सीधे तौर पर आरोपी नहीं बनाया गया था।

SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं

SIT की रिपोर्ट में दान गणना के दौरान बैंक और ट्रस्ट की निगरानी व व्यवस्था में कुछ कमजोरियों और चूकों का जिक्र किया गया था। इसलिए, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत किया जा रहा है। UP के गृह विभाग ने SIT की फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं हैं। इससे पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने मंदिर में दान के प्रबंधन में गड़बड़ी के आरोपों के बाद 27 जून को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

13 जून को हुआ था SIT का गठन

ट्रस्ट के अनुरोध पर, सरकार ने 13 जून को लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली SIT का गठन किया। IG (रेंज) किरण एस और स्पेशल सेक्रेटरी (वित्त) नील रतन कुमार को SIT का सदस्य नियुक्त किया गया। जांच के दौरान, टीम ने चढ़ावे से जुड़े मामले में तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच की। रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए थे, जिसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की गई।

FIR के बाद 8 लोगों की हुई गिरफ़्तारियां

शुरुआती जांच के आधार पर, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने श्री राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। 25 जून को FIR दर्ज की गई, जिसमें आठ लोगों और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। FIR में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव (उर्फ टीनू) शामिल हैं।

नामजद सभी आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और उनके ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है। SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर ही बाद में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में FIR दर्ज की गई और गिरफ़्तारियां की गईं।

अनिल मिश्रा-चंपत राय की भूमिका पर उठ रहे थे सवाल

चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिकाओं पर सवाल उठे थे। इस विवाद के बीच, दोनों ने ट्रस्ट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्हें राहत मिली है क्योंकि राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट में उनके नाम शामिल नहीं हैं। मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था। यह पैनल सुप्रीम कोर्ट के किसी भी दखल से पहले बनाया गया था।

इस मामले में चंपत राय ने कहा कि चढ़ावा इकट्ठा करने में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और गड़बड़ियों को रोकना उनकी ज़िम्मेदारी का हिस्सा था, और कथित गड़बड़ी का पता चलने पर उन्होंने कार्रवाई की। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध चोरी के बारे में उन्होंने खुद शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया।


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