राज्यपाल राम नाईक ने गांधी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की

लखनऊ– राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने हज़रतगंज स्थिति गांधी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ ही महात्मा गांधी के प्रिय भजनों को भी गुनगुनाया। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सत्य और अहिंसा के मार्गों पर चलने की आवश्यकता है। भजन की एक एक पंक्ति हमें आगे चलने के लिए मार्गदर्शन दिखाती है। इसमें से 2 पंक्तियां आज के संदर्भ में हमें महत्वपूर्ण लगती है इसलिए मैं बता देता हूं। डटे रहो इस जन्म भूमि में जिस पुण्य भूमि में जन्म लिया

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January 30, 2018

लखनऊ– राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने हज़रतगंज स्थिति गांधी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ ही महात्मा गांधी के प्रिय भजनों को भी गुनगुनाया।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सत्य और अहिंसा के मार्गों पर चलने की आवश्यकता है। भजन की एक एक पंक्ति हमें आगे चलने के लिए मार्गदर्शन दिखाती है। इसमें से 2 पंक्तियां आज के संदर्भ में हमें महत्वपूर्ण लगती है इसलिए मैं बता देता हूं। डटे रहो इस जन्म भूमि में जिस पुण्य भूमि में जन्म लिया बलिदान उसी पर हो जाएं। वह शक्ति दो हमें दयानिधान कर्तव्य मार्ग पर डट जावे” और इसलिए सभी देशवासियों को मेरा एक संदेश है कि अपने-अपने कर्त्तव्यो का निर्वाहन पूर्ण शक्ति के साथ करें। 

राज्यपाल ने सबको अपने कर्त्तव्यो का पालन करने को कहते हुए कहा अपना कर्तव्य पथ पर  निरंतर चलते रहना चाहिए और मैं राज्यपाल हूं तो राज्यपाल के कुछ कर्तव्य हैं, सरकार हैं मंत्री हैं, उनके लिए भी कर्तव्य है। उनके आम जनता के लिए भी कर्तव्य हैं और यह कर्तव्य है कि जिस मातृभूमि में हमने जन्म लिया उसके कल्याण के लिए हम सबको एक होकर काम करना चाहिए। ऐसे में जाति-जाति का विद्वेष स्त्री-पुरुष का विद्वेष जैसे मतभेदों को भूल कर आगे बढ़ना होगा।आज हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए। जो चित्र महात्मा गांधी ने उस समय पर देश के सामने रखा कि स्वदेशी का आंदोलन हो, शुद्ध आचरण का आंदोलन, हो नमक का सत्याग्रह हो, जो भी बातें उन्होंने अपने जीवन में की वे प्रेरणा देती है। तब से लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। उसी के एक प्रतीक के रूप में  हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को देखते हैं।