मगहर में गरजे मोदी, कहा- जात-पात के नाम पर समाज तोड़ रहे हैं कुछ दल

न्यूज डेस्क — जाति-पंथ से परे होकर मानवता के धर्म का अनुपालन करने की सीख देने वाले संत कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर पहुंचे.यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एकजुट विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा कि जात-पात के नाम पर कुछ राजनीतिक दल समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं. पीएम मोदी ने इससे पहले कबीर अकादमी की आधारशिल पट्टिका का अनावरण भी किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा का संबोधन भोजपुरी में शुरू किया तो वहां का जनसानस उनका मुरीद हो गया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कबीर

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June 28, 2018

न्यूज डेस्क — जाति-पंथ से परे होकर मानवता के धर्म का अनुपालन करने की सीख देने वाले संत कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर पहुंचे.यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एकजुट विपक्ष पर जमकर निशाना साधा.

पीएम मोदी ने कहा कि जात-पात के नाम पर कुछ राजनीतिक दल समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं. पीएम मोदी ने इससे पहले कबीर अकादमी की आधारशिल पट्टिका का अनावरण भी किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा का संबोधन भोजपुरी में शुरू किया तो वहां का जनसानस उनका मुरीद हो गया.

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कबीर को समझने के लिए कोई भाषा नहीं गढ़ी. बोलचाल की भाषा का इस्‍तेमाल किया. बोलचाल की भाषा में ही उन्‍होंने जीवन दर्शन को बताया. उनके कई दोहों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के साथ समाज में आने वाली आंतरिक बुराइयों को समाप्‍त करने के लिए ऋषियों, मुनियों ने हमें मार्ग दिखाया.  देश की चेतना को बचाने का कार्य संतों ने समय-समय पर किया.

संत कबीर के बाद संत रैदास आए. अंबेडकर आए. सभी ने अपने-अपने तरीके से समाज को रास्‍ता दिखाया. बाबा साहब अंबेडकर ने हमें जीने का अधिकार दिया. आज समाज में राजनीतिक लाभ लेने के लिए समाज में असंतोष पैदा कर रहे हैं. गरीब के लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए तत्कालीन प्रदेश सरकार ने सहयोग नहीं किया. 

इसके अलावा पीएम ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा,कुछ दलों को शांति और विकास नहीं, कलह और अशांति चाहिए, उनको लगता है जितना असंतोष और अशांति का वातावरण बनाएंगे, उतना राजनीतिक लाभ होगा.” उन्होंने कहा,सत्ता का लालच ऐसा है कि आपातकाल लगाने वाले और उस समय आपातकाल का विरोध करने वाले एक साथ आ गए हैं. ये समाज नहीं, सिर्फ अपने और अपने परिवार का हित देखते हैं.