मंत्री मोहसिन रजा को लगा झटका, शादी का पांजीकरण हुआ रद्द

लखनऊ – सूबे के मंत्री मंत्री मोहसिन रजा को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब एडीएम टीजी अनिल कुमार ने अल्पसंख्यक विवाह एक्ट के तहत कचहरी में निकाह का रजिस्ट्रेशन करने पहुंचे मंत्री का पंजीकरण रद्द कर दिया। वहीं एडीएम टीजी अनिल कुमार ने बताया कि ‘कागजी कार्यवाही में खामियां पाई गईं। इसके साथ ही कार्यालय की तरफ से दो बार मंत्री मोहसिन रजा को रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्राप्त करने की जानकारी फोन से दी गई, लेकिन मंत्री मोहसिन रजा व उनकी पत्नी रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं करने आईं। इसी वजह से इनकी एप्लीकेशन कैंसिल कर दी गई।’  सूत्रों की माने

Written By :

admin

Updated

November 23, 2017

लखनऊ – सूबे के मंत्री मंत्री मोहसिन रजा को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब एडीएम टीजी अनिल कुमार ने अल्पसंख्यक विवाह एक्ट के तहत कचहरी में निकाह का रजिस्ट्रेशन करने पहुंचे मंत्री का पंजीकरण रद्द कर दिया।

वहीं एडीएम टीजी अनिल कुमार ने बताया कि ‘कागजी कार्यवाही में खामियां पाई गईं। इसके साथ ही कार्यालय की तरफ से दो बार मंत्री मोहसिन रजा को रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्राप्त करने की जानकारी फोन से दी गई, लेकिन मंत्री मोहसिन रजा व उनकी पत्नी रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं करने आईं। इसी वजह से इनकी एप्लीकेशन कैंसिल कर दी गई।’ 

सूत्रों की माने तो दोनों ही बार फोन पर राज्य मंत्री ने अतिव्यस्तता की बात कहते हुए आवेदन निरस्त हो जाने पर रजिस्ट्रेशन के लिए पुन: आवेदन कर प्रमाणपत्र प्राप्त करने की बात कही थी। अब उन्हें निकाह का कानूनी तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए नए सिरे से आवेदन कर पूरी प्रक्रिया को दोहराना पड़ेगा।  

गौरतलब है कि योगी सरकार द्वारा सभी समुदाय के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता के बाद निकाह का वैधानिक रजिस्ट्रेशन कराने की पहल से मंत्री चर्चा में आए थे। मोहसिन रजा ने प्रदेश सरकार के निर्णय को बेहतर सोच बताते हुए इसी साल अगस्त में निकाह के 16 साल बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर पंजीयन का आवेदन किया था।   

इस दौरान उनकी पत्नी फौजिया फातिमा, वालिदा जाहिदा बेगम सास हाजरा बेगम व ससुर जमाल हामिद भी साथ मौजूद थे। राज्य मंत्री ने तात्कामलिक प्रभारी अधिकारी एडीएम टीजी के कक्ष में पहुंच कर अधिवक्ता के माध्यम से निकाह के वैधानिक रजिस्ट्रेशन को जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें गवाह के बतौर उनकी वालिदा व सास ससुर ने खुद आगे आकर हस्ताक्षर किए थे।