इस जिले में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बिगाड़ दिया पार्टियों का गणित 

बहराइच— प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में जिले में २६ नवंबर को मतदान होना है । सभी राजनैतिक पार्टियां शहर की सरकार की गद्दी पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रही है ।लेकिन जिले की सदर नगर पालिका व रिसिया नगर पंचायत से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने सत्ताधारी पार्टी भाजपा समेत सपा , बसपा ,कांग्रेस व आप पार्टी के उम्मीदवारों के चुनावी गणित को गड़बड़ा दिया है । इनके समर्थन में जाति व धर्म की राजनीति को नकारते हुए मिल रहे भारी जनसमर्थन से राजनैतिक पंडित भी कोई अनुमान नही लगा पा

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November 21, 2017

बहराइच— प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में जिले में २६ नवंबर को मतदान होना है । सभी राजनैतिक पार्टियां शहर की सरकार की गद्दी पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रही है ।लेकिन जिले की सदर नगर पालिका व रिसिया नगर पंचायत से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने सत्ताधारी पार्टी भाजपा समेत सपा , बसपा ,कांग्रेस व आप पार्टी के उम्मीदवारों के चुनावी गणित को गड़बड़ा दिया है ।

इनके समर्थन में जाति व धर्म की राजनीति को नकारते हुए मिल रहे भारी जनसमर्थन से राजनैतिक पंडित भी कोई अनुमान नही लगा पा रहे है । जिले में दो नगर पालिका व दो नगर पंचायतों के लिये दूसरे चरण में 23 नवंबर को मतदान होना है । शहर की सरकार की सकरार पर कब्जेदारी के लिये सत्ताधारी भाजपा समेत सपा ,बसपा व आप पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है । जहाँ भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में खुद प्रदेश के सी एम योगी जनसभा कर प्रत्याशी को जिताने की अपील कर चुके है । वही सपा की बागडोर खुद पूर्व मंत्री यासर शाह ने सम्हाल रक्खी है । 

जिले की सदर नगरपालिका अध्यक्ष पद पर काफी रोचक मुकाबला हो रहा है मतदान में कुछ ही दिन शेष बचे है । लेकिन यहां पर निर्दलीय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रही निवर्तमान अध्यक्ष रेहान की पत्नी रुबीना को मिल रहे जनसमर्थन ने भाजपा समेत सभी राजनैतिक पार्टियों को सकते में डाल दिया है हर वर्ग के मिल रहे समर्थन को देखकर  राजनैतिक पंडित भी हैरान है ।

वही शहर से सटी रिसिया नगर पंचायत से भाजपा से टिकट कटने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में कूदे निवर्तमान अध्यक्ष राजेश निगम भी अन्य पार्टी प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द बने हुए है । अगर लोगो की माने तो इस बार नगर की सरकार के लिए हो रहे चुनाव में जनता जातीय व धार्मिक आधार पर एकजुट होने के बजाय अपना नुमाइंदा चुनने के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों के क्रिया कलाप व उनके व्यवहार को देखकर ही मतदान का मन बना रही है ।

वही सभी राजनैतिक पार्टिया भी अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए आश्वश्त दिख रही है ।ताज किसके सर बंधेगा ये तो 1 दिसंबर को होने वाली मतगणना के दिन ही पता चलेगा लेकिन इतना जरूर है कि इस बार के चुनाव में जनता निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में लामबंद होते दिख रही है वही राजनैतिक पार्टियों को भी अपनी रणनीति की समीक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।