यहां मुर्दों के साथ सोते हैं स्वास्थ्य कर्मचारी !

हरदोई– उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सरकारी कामकाज में लापरवाही का खामियाजा स्वास्थ्य विभाग के आधा दर्जन कर्मचारियों को मुर्दो के साथ दिन रात बिताकर और उनके संग सोकर भुगतना पड़ रहा है । हालात इतने बुरे हैं कि किसी किसी दिन इन कर्मचारियों को एक साथ दो या तीन मुर्दों के साथ सोकर रात ही नहीं बितानी पड़ रही है बल्कि अपने सारे दैनिक कामकाज भी करने पड़ रहे है। दरअसल यह पूरा मामला हरदोई के नए बने पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा हुआ है जो अभी एक महीने से हरदोई से 7 किलोमीटर दूर काम करना शुरू किया है। वर्ष

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January 22, 2018

हरदोई– उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सरकारी कामकाज में लापरवाही का खामियाजा स्वास्थ्य विभाग के आधा दर्जन कर्मचारियों को मुर्दो के साथ दिन रात बिताकर और उनके संग सोकर भुगतना पड़ रहा है ।

हालात इतने बुरे हैं कि किसी किसी दिन इन कर्मचारियों को एक साथ दो या तीन मुर्दों के साथ सोकर रात ही नहीं बितानी पड़ रही है बल्कि अपने सारे दैनिक कामकाज भी करने पड़ रहे है। दरअसल यह पूरा मामला हरदोई के नए बने पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा हुआ है जो अभी एक महीने से हरदोई से 7 किलोमीटर दूर काम करना शुरू किया है। वर्ष 2014 में स्वास्थ्य विभाग ने लगभग तीस करोड़ की लागत से 100 बेड के अस्पताल , आधुनिक चीरघर ,सीएमओ ऑफिस के साथ-साथ डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए भवनों के निर्माण कार्य का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम को सौपा था।

इस पूरे प्रोजेक्ट को राजकीय निर्माण निगम को कार्य कराकर वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करना था। लेकिन निर्माण निगम के काम में देरी के चलते अभी तक सभी निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए जबकि आधुनिक चीलघर प्रारंभ कर दिया गया। अब ऐसे में यहां पर तैनात फार्मेसिस्ट और वार्ड बॉय जिनके लिए कुछ दूरी पर आवास तो बने हैं लेकिन चुकी राजकीय निर्माण निगम का काम अधूरा है ऐसे में यह नवनिर्मित अस्पताल और आवास अभी तक स्वास्थ विभाग को हैंडओवर नहीं किये गए है।  तो इस आधुनिक चीलघर में तैनात इन सभी स्वास्थ्य विभाग के करीब आध दर्जन कर्मियों को रात रात भर मुर्दों के साथ ही रहना पड़ रहा है। दो मंजिला इस आधुनिक चीलघर में नीचे शव बंद किये जाते है तो बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में यह कर्मी मज़बूरी में अपना डेरा जमाये स्वास्थ्य विभाग के हाकिम से अपनी मज़बूरी की गुहार लगा चुके है। 

रिपोर्ट – सुनील अर्कवंशी , हरदोई