कवि केदारनाथ सिंह के निधन पर पैतृक गांव में छाई मायूसी

बलिया– बलिया की माटी के अनमोल पूत केदार सिंह के निधन से पूरा बलिया मर्माहत है ।बलिया जनपद के बैरिया विधान सभा के चकिया में डोमन सिंह के घर 1934 में एक बच्चे का जन्म हुआ । जिनकी गांव के स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत पिता डोमन सिंह ने उन्हें उदय नरायण कालेज वाराणसी में 5 वी में दाखिला कराया , जहां से 12 तक की शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी हिन्दू विश्व विद्यालय में दाखिला लिए जहा से इन्होंने शिक्षा प्राप्त कर हिंदी साहित्य में अपना परचम लहराया । केदार सिंह बलिया

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March 20, 2018

बलिया– बलिया की माटी के अनमोल पूत केदार सिंह के निधन से पूरा बलिया मर्माहत है ।बलिया जनपद के बैरिया विधान सभा के चकिया में डोमन सिंह के घर 1934 में एक बच्चे का जन्म हुआ ।

जिनकी गांव के स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत पिता डोमन सिंह ने उन्हें उदय नरायण कालेज वाराणसी में 5 वी में दाखिला कराया , जहां से 12 तक की शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी हिन्दू विश्व विद्यालय में दाखिला लिए जहा से इन्होंने शिक्षा प्राप्त कर हिंदी साहित्य में अपना परचम लहराया ।

केदार सिंह बलिया के मिटटी में जन्म लेकर बलिया से हमेसा जुड़े रहे ।भले ही हिंदी साहित्य में उन्हों ने परचम लहराया पर गांव वालो के लिए एक सरल स्वभाव वाले केदार ही रहे । इनके माँ बाप कि दो सन्ताने थी एक लड़की और एक लड़का केदार नाथ सिंह  । वैसे केदार नाथ सिंह  उदित नरायण कालेज पडरौना से सम्बंधित रहे ।इसके उपरांत 1976 में जवाहर लाल विश्वविद्यालय दिल्ली में अध्यापन कार्य किया और वही से सेवानिवृत हुए इसके उपरांत ये अक्सर गांव आते रहते थे ।

इनकी मुख्य कृतिया है कविता संग्रह,अभी विल्कुल अभी,जमींन पक रही,यहाँ से देखो,अकाल मेसारस,उत्तर कबीर तथा अन्य कविताये एवं तालस्ताये और साईकिल आदि काब्य सन्ग्रह प्रकाशित हुए ।गद्य कृतियों में कल्पना और छायावाद आधुनिक हिंदी कविता में विम्ब विधान मेरे समय के शब्द ,कब्रिस्तान में पंचायत आदि मुख्य है ।काब्य पाठ के लिए आपने अमेरिका ,रूस तथा तजाकिस्तान आदि देशो कि यात्रा क़ी। इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार ,मैथली सरण गुप्त सम्मान दिनकर पुरस्कार तथा जीवन भारती सम्मान से सम्मानित किया गया है ।

(रिपोर्ट- मनोज चतुर्वेदी ,बलिया)