CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद ‘ककरोच जनता पार्टी’ (CJP) के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। वहीं, अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। दिल्ली की स्पेशल कोर्ट फैसला सुनाया। तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में एहतियाती के तौर पर सुबह 3 बजे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें बुधवार सुबह स्पेशल कोर्ट के सामने पेश किया गया था। इस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और युवाओं को जेल भेजना कायरता है।
तिहाड़ जेल भेजे गए सौरव-आशुतोष
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने CJP के 14 सदस्यों के खिलाफ कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशनों में दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं, जिनमें प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को CJP के ये सदस्य एक निजी संपत्ति के रास्ते प्रतिबंधित जंतर-मंतर इलाके में पहुंचे और पुलिसकर्मियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुंचाई। इसके बाद पुलिस ने तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। तीनों व्यक्तियों को आज सुबह एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद किया गया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर लगी रोक
दरअसल दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को तय विरोध-प्रदर्शन वाली जगहों की लिस्ट से हटा दिया है, जिसका मतलब है कि वहां विरोध-प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह फैसला गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था। दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहों रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली में CBD मैदान को तय किया गया है।
वहीं मंगलवार 13 अक्टूबर की सुबह CJP नेताओं ने इसी फैसले का विरोध करने के लिए यह प्रदर्शन किया था। जबकि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने CJP सदस्यों को रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बावजूद, कार्यकर्ता अंदर घुस गए और पुलिस को उनके काम में बाधा पहुंचाई।
पुलिस ने दर्ज की FIR
पुलिस ने सभी 14 सदस्यों को हिरासत में ले लिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की। पुलिस के अनुसार, इस मामले में पहली FIR (नंबर 289/26) कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 223(a), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई। दूसरी FIR (नंबर 128/26) संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज की गई। दोनों मामलों में कुल 14 सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप
साथ ही पुलिस ने CJP के मुख्य सदस्यों आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ अलग से एहतियाती कार्रवाई शुरू की। तीनों सदस्यों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस का आरोप था कि इन सदस्यों की गतिविधियों से सार्वजनिक शांति भंग होने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि ये तीनों व्यक्ति सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को ऐसी ही गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे थे। इन्हीं आधारों पर, उन्हें संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया और स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया था।
सौरव-आशुतोष की गिरफ्तारी पर बिफरे राहुल
उधर पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को सरकार की कड़ी आलोचना की। ‘X’ पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, “जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण काम है। छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग बैनर तले एक ही मकसद के लिए एकजुट हैं। नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।”
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