लखनऊ: दिवाली और छठ पूजा के दौरान संभावित दुर्घटनाओं, आग लगने की घटनाओं, सड़क हादसों और अन्य आपातकालीन स्थितियों को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों तथा उनसे जुड़े अस्पतालों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का निर्देश दिया है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों के दौरान किसी भी नागरिक को आपातकालीन चिकित्सा सहायता पाने में परेशानी न हो और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज मिल सके।
चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक, नेहा शर्मा ने शुक्रवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे चिकित्सा सेवाओं, मानव संसाधनों, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और आपातकालीन बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
24/7 चालू रहेंगी आपातकालीन सेवाएं
सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में जीवन रक्षक चिकित्सा सेवाएं—जिनमें आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, बर्न यूनिट, तथा एनेस्थीसिया, सर्जरी और ऑपरेशन की सुविधाएं चौबीसों घंटे चालू रहेंगी। आपातकालीन विभाग में आने वाले मरीजों की तुरंत जांच की जाएगी और जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। साथ ही, मरीजों की स्थिति की गंभीरता के आधार पर इलाज को प्राथमिकता देने और अतिरिक्त बेड तथा चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए ड्यूटी रोस्टर
त्योहारों के दौरान आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, बर्न यूनिट, एनेस्थीसिया, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, मेडिसिन और रेडियोलॉजी जैसे विभागों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों के लिए ड्यूटी रोस्टर तैयार किए जाएंगे। सभी निर्धारित कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्टाफ को भी ‘स्टैंडबाय’ पर रखा जाएगा।
जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता पर जोर
सभी संबंधित विभागाध्यक्षों और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं, इंजेक्शन, ड्रेसिंग सामग्री, टांके लगाने के सामान (सूचर्स), प्लास्टर सामग्री और आपातकालीन उपचार किट की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें। इसके अलावा, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली, वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और सक्शन मशीन सहित सभी आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यक्षमता की भी जांच की जाएगी। ब्लड बैंकों के साथ समन्वय करके रक्त और रक्त के घटकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
रेफरल प्रणाली को मजबूत करना
गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उच्च-स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भेजने की आवश्यकता पड़ने पर, एक प्रभावी रेफरल प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिसमें पहले से समन्वय (coordination) सुनिश्चित किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि मरीजों को स्थानांतरण के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता और एम्बुलेंस सेवाएं मिलें, और इस प्रक्रिया में कोई अनावश्यक देरी न हो।
आग और दुर्घटनाओं के लिए विशेष तैयारी
मेडिकल कॉलेजों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों – जैसे इमरजेंसी विभाग, ICU, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन प्लांट, इलेक्ट्रिकल पैनल, प्रयोगशालाओं, हॉस्टल और अन्य संवेदनशील स्थानों – में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के साथ-साथ कि फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा प्रणालियाँ पूरी तरह से काम कर रही हैं, यह भी निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल के निकास मार्गों (exit routes) और सीढ़ियों को किसी भी तरह की रुकावट से मुक्त रखा जाए।
नोडल अधिकारी करेंगे कामकाज की निगरानी
महानिदेशक ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, निदेशकों और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को मौजूदा व्यवस्थाओं की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने का निर्देश दिया है। ड्यूटी रोस्टर, संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन तैयारियों की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किया जाएगा। इन निर्देशों के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
आपदा से निपटने के लिए अस्पताल तैयार
सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों को अपनी आपदा प्रबंधन योजना (डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान) की समीक्षा करने और उसे अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। बड़ी संख्या में घायलों के आने, सड़क दुर्घटनाओं, आग लगने की घटनाओं या भगदड़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट कार्य योजना तैयार की जाएगी। घायलों की स्थिति की गंभीरता के आधार पर इलाज की प्राथमिकता तय करने के लिए ‘ट्राइएज’ (triage) प्रणाली लागू की जाएगी, ताकि गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
अस्पतालों में उचित व्यवस्था के निर्देश
अस्पतालों में उचित स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, पीने के पानी की उपलब्धता, बिजली की निरंतर आपूर्ति (बैकअप सहित), ऑक्सीजन की उपलब्धता और साफ-सुथरे शौचालय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बर्न यूनिट, आईसीयू (ICU) और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, ऑक्सीजन प्लांट और पाइपलाइन सिस्टम की नियमित जांच की जाएगी।
ये भी पढ़ेंः-PAK vs ENG: शादाब-रऊफ ने 10वें विकेट के लिए रिकॉर्ड साझेदारी कर इंग्लैंड के जबड़े से छीनी जीत
ये भी पढ़ेंः-‘मोदी का बाप भी जाएगा’ वाले बयान पर खड़गे के खिलाफ बीजेपी का लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन
(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं…)

