फर्जीवाड़ा करके हथियाई नौकरी, 30 साल बाद धरा गया मुन्नाभाई

एटा —एटा में फर्जी मार्कशीट लगाकर 30 सालों से ज्यादा नौकरी करने वाले मुन्ना भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। नगर पालिका के करोड़पति बाबू निरंकार सिंह यादव के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने शहर कोतवाली में मामला दर्ज कर लिया है।  नगर पालिका में माली के पद पर तैनात इस मुन्ना भाई ने फर्जीवाड़ा करते हुए जाली मार्कशीट लगाकर क्लर्क की नौकरी हथिया ली और 30 सालों से ज्यादा की नौकरी कर डाली। इतना ही नहीं नगर पालिका में तैनात इस करोड़पति बाबू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गृहकर, जलकर, दुकान किराया

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September 3, 2018

एटा —एटा में फर्जी मार्कशीट लगाकर 30 सालों से ज्यादा नौकरी करने वाले मुन्ना भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। नगर पालिका के करोड़पति बाबू निरंकार सिंह यादव के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने शहर कोतवाली में मामला दर्ज कर लिया है। 

नगर पालिका में माली के पद पर तैनात इस मुन्ना भाई ने फर्जीवाड़ा करते हुए जाली मार्कशीट लगाकर क्लर्क की नौकरी हथिया ली और 30 सालों से ज्यादा की नौकरी कर डाली। इतना ही नहीं नगर पालिका में तैनात इस करोड़पति बाबू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गृहकर, जलकर, दुकान किराया आदि कीफर्जी रशीदें काटकर करोड़ों रुपये गबन का आरोप है।

नगर पालिका में तैनात जरा इस शख्श को गौर से देखिये, ये है एटा का मुन्ना भाई जिसका नाम निरंकार सिंह यादव है। सपा सरकार रही हो या फिर बसपा सरकार अपनी ऊंची पहुंच और रसूख के दम पर जिस अधिकारीने भी इनके ऊपर हांथ डाला उसका ट्रांसफर कराने में इसे जरा भी देर नहीं लगी। यही वजह है कि अपने रसूख के बल पर 1986 में ये शख्श माली के पद पर भर्ती हुआ, लेकिन उच्च महत्वकांक्षा के चलते इसे माली के पद पर काम करना बिल्कुन भी नहीं सुहाया। इसके फितरती दिमाग में बाबू कीनौकरी पाने का ऐसा फितूर जागा कि 1987 में फर्रुखाबाद के स्वामी आत्मदेवगोपालानन्द इण्टर कालेज से इसने बैठे-बैठे इंटर परीक्षा की मार्कशीट विभाग में लगा दी। फर्जीवाड़ा करते हुए माली के पद पर भर्ती हुआ निरंकारसिंह यादव 1987 में प्रोन्नत पाकर बाबू बन बैठा और फिर इसने भ्रष्टाचारकी सीमा को लांघते हुए पालिका की गृहकर, जलकर, दुकानों के किराये कीफर्जी रशीदे काटकर करोड़ों रुपये की वसूली की। ये वसूली पालिका के लिएनहीं बल्कि खुद के लिए थी। लेकिन उसके फर्जीवाड़े की जब परते खुलनी शुरु हुयी तो अधिकारी भी हैरान रह गये।

दरअसल 1987 में इस करोड़पति बाबू निरंकार सिंह यादव ने जिस रोल नम्बर (0477765) की मार्कशीट पेशकी है वो इसका नहीं बल्कि इंटर की प्राईवेट छात्रा साधना सक्सेना का था ।जिसे इसने बाबू की नौकरी हथियाने के लिए विभाग में पेश कर दी। नगरपालिका में अपने जलवे और रसूख के दम पर तीस सालों से ज्यादा कीनौकरी करने वाले इस मुन्ना भाई के फर्जी दस्तावेजों के सहारे बाबू कीनौकरी हथियाने के बाद करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति बनाने वाले इस बाबूके खिलाफ पूर्व जिलाधिकारी अमित किशोर ने एडीएम(एफआर) को जॉंच सौपी थी और इसे गंभीर मसला मानते हुए जॉंच कराई थी जिसके बाद जॉंच में दोषी पाये जाने के बाद जिलाधिकारी आई पी पाण्डेय ने इस करोड़पति बाबू के खिलाफ नगर कोतवाली में मामला दर्ज करने के निर्देश दिये जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जॉंच के साथ ही वैधानिक कार्यवाई किए जाने की बात कही है।

(रिपोर्ट -आर. बी. द्विवेदी , एटा )