NEET Paper Leak Protest: नीट परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। दिल्ली में छात्रों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर विपक्ष सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगा रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। संसद के भीतर बहस और बाहर विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री के फास्ट-ट्रैक कोर्ट वाले फैसले, विपक्ष की मांगों और दिल्ली पुलिस की सफाई ने इस पूरे विवाद को नया राजनीतिक और संवैधानिक आयाम दे दिया है।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी हैं। छात्रों के आंदोलन ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। विपक्ष सरकार को युवाओं के भविष्य के सवाल पर घेर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष छात्रों के कंधों पर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष का छात्रों के हितों से कोई सरोकार नहीं है और वह केवल उन्हें आगे करके राजनीतिक लाभ लेना चाहता है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी।
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाए जा रहे उचित कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रोजगार, स्टार्टअप और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में युवाओं को व्यापक अवसर मिले हैं। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए सरकार कड़े फैसले ले रही है, जबकि विपक्ष केवल विरोध की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि जिन राज्यों में वे सत्ता में रहे हैं, वहां भी कई बार भर्ती परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द हुई हैं। ऐसे में केवल केंद्र सरकार को निशाना बनाना उचित नहीं है। धामी ने कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और त्वरित न्याय ही छात्रों का भरोसा बहाल कर सकता है। उधर, केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने भी विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए।
किसी के राजनीतिक बहकावे में न आएं छात्रः शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार अपना रुख बदल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे सड़क की बजाय संसद में बहस करनी चाहिए। शेखावत ने छात्रों से भी अपील की कि वे किसी के राजनीतिक बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों को राजनीतिक दिशा देने की कोशिश नई नहीं है और कई बार युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगाने में जुटी सरकारः प्रल्हाद जोशी
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पेपर लीक की समस्या किसी एक सरकार या एक राज्य तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई राज्यों में ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कानून बनाकर कठोर कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। उनके अनुसार, सभी दलों को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर स्थायी रोक लग सके। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोषियों को शीघ्र सजा मिलेगी और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा। उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया और कहा कि लोकतंत्र में किसी भी गंभीर विषय का सबसे उपयुक्त मंच संसद ही है।
नीट पेपर लीक का मुद्दा परीक्षा प्रणाली तक ही सीमित नहीं
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति, संसद की कार्यवाही और सड़क पर हो रहे आंदोलनों का प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार सख्त कानून, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और जांच एजेंसियों की कार्रवाई का हवाला देकर भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद की बहस, जांच की प्रगति और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि यह विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का आधार बनता है।
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