लखनऊ रिवर फ्रंट घोटाले में बड़ी कार्रवाई, CBI ने चीफ इंजीनियर को किया गिरफ्तार

सपा सरकार में राजधानी लखनऊ में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में CBI ने बड़ी कार्यवाई करते हुए सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता रूप सिंह यादव और वरिष्ठ सहायक राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

Written By :

SK Sharma

Updated

November 20, 2020

सपा सरकार में राजधानी लखनऊ में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में CBI ने बड़ी कार्यवाई करते हुए सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता रूप सिंह यादव और वरिष्ठ सहायक राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने शुक्रवार को दोनों को कोर्ट में पेश करके चार दिनों की पुलिस हिरास्त में ले लिया है। अब दोनों से घोटाले के संबंध में गहन पूछताछ होगी।

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CBI 2017 में दर्ज किया था मुकदमा…

बता दें कि CBI लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाकर 30 नवंबर 2017 में नया मुकदमा दर्ज किया था।

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (अब सेवानिवृत्त) गुलेश चंद, एसएन शर्मा व काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह व रूप सिंह यादव तथा अधिशासी अभियंता सुरेश यादव नामजद हैं। सीबीआई ने अपनी जांच शुरू भी कर दी। उसने सिंचाई विभाग से हासिल पत्रावलियों की जांच करने के अलावा कुछ आरोपियों से पूछताछ भी की।

सीबीआई जांच की संस्तुति करने से पहले प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2017 को इस घोटाले की न्यायिक जांच कराई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने जांच में दोषी पाए गए इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने की संस्तुति की थी।

अधूरा पड़ा काम, 95 प्रतिशत धनराशि खत्म..

इसके बाद 19 जून 2017 को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डॉ. अंबुज द्विवेदी ने गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया थी। बाद में यह जांच सीबीआई को स्थानान्तरित हो गई।

सीबीआई अब इस आरोप की जांच कर रही है कि प्रोजेक्ट के तहत निर्धारित कार्य पूर्ण कराए बगैर ही स्वीकृत बजट की 95 प्रतिशत धनराशि कैसे खर्च हो गई? प्रारंभिक जांच के अनुसार प्रोजेक्ट में मनमाने तरीके से खर्च दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई है। यह प्रोजेक्ट लगभग 1513 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 1437 करोड़ रुपये काम खर्च हो जाने के बाद भी 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया।

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