PM मोदी के ‘हनुमान’ चिराग बदलेंगे यूपी का समीकरण, उपचुनाव में LJP उतारेगी अपने प्रत्याशी

Chirag Paswan: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान 26 सितंबर को कौशांबी में रैली करेंगे। बताया जा रहा है कि इस रैली के जरिए चिराग अन्य दलित मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। भाजपा के तीसरे कार्यकाल में मंत्री बनने के बाद पासवान का यह पहला उत्तर प्रदेश दौरा है। इस रैली को सफल बनाने के लिए बिहार की जमुई सीट से लोजपा सांसद अरुण भारतीय प्रयागराज पहुंचे हैं।बताया जा रहा है कि चिराग की इस रैली में पार्टी के कई सांसद शामिल होंगे। वहीं सांसद अरुण भारतीय ने कहा कि

Written By :

SK Sharma

Updated

September 27, 2024

Chirag Paswan: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान 26 सितंबर को कौशांबी में रैली करेंगे। बताया जा रहा है कि इस रैली के जरिए चिराग अन्य दलित मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। भाजपा के तीसरे कार्यकाल में मंत्री बनने के बाद पासवान का यह पहला उत्तर प्रदेश दौरा है।

इस रैली को सफल बनाने के लिए बिहार की जमुई सीट से लोजपा सांसद अरुण भारतीय प्रयागराज पहुंचे हैं।
बताया जा रहा है कि चिराग की इस रैली में पार्टी के कई सांसद शामिल होंगे। वहीं सांसद अरुण भारतीय ने कहा कि भाजपा से हमारा समझौता सिर्फ लोकसभा और बिहार विधानसभा चुनाव के लिए है।

हमारा समझौता यूपी से नहीं

अरुण भारतीय ने अपने बयान में कहा कि भाजपा से हमारा समझौता सिर्फ केंद्र और बिहार विधानसभा में है। उत्तर प्रदेश में हमारा कोई समझौता नहीं है। हमारे संगठन ने यहां तैयारी कर ली है और अगर पार्टी के कुछ लोग चुनाव लड़ना चाहते हैं तो लोजपा (रामविलास) उत्तर प्रदेश विधानसभा में जरूर चुनाव लड़ेगी। संविधान और आरक्षण को खतरे में बताने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने में चिराग और उनकी पार्टी ही सक्षम है। चिराग की वजह से ही बिहार में संविधान और आरक्षण का नारा काम नहीं आया। उनके मुताबिक चुनाव लड़ने का फैसला उत्तर प्रदेश कमेटी पर छोड़ दिया गया है।

किन सीटों पर लड़ना है केंद्रीय नेतृत्व करेगा तय

लोजपा (रामविलास) सांसद के मुताबिक कमेटी जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला करेगी, वहां केंद्रीय नेतृत्व उम्मीदवारों के नाम तय करेगा। कई बार दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार के मुखिया को भी आवाज उठानी पड़ती है। पिछली सरकारों में कुछ वर्गों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसे चुनाव और सरकार के जरिए दूर करने की कोशिश की जाएगी।

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