‘अब ब्रिटिश कालीन IPC और CRPC कानूनों में होगा बदलाव’- अमित शाह

लखनऊ–केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मानना है कि ब्रिटिश राज में बने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) जैसे कानून अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। ब्रिटिश हुकूमत ने इन कानूनों को भारत पर शासन करने के लिए बनाया था, जबकि हमारी प्राथमिकता इस देश के नागरिक और गरीब से गरीब व्यक्ति हैं, जिन्हें सुरक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें इसका आभास भी कराना है। मौजदा जरूरतों के मुताबिक इन कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय 47वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस (All India Police Science Congress 2019) के शुक्रवार को

Written By :

Shweta Singh

Updated

November 30, 2019

लखनऊ–केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मानना है कि ब्रिटिश राज में बने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) जैसे कानून अब अप्रासंगिक हो चुके हैं।

ब्रिटिश हुकूमत ने इन कानूनों को भारत पर शासन करने के लिए बनाया था, जबकि हमारी प्राथमिकता इस देश के नागरिक और गरीब से गरीब व्यक्ति हैं, जिन्हें सुरक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें इसका आभास भी कराना है। मौजदा जरूरतों के मुताबिक इन कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय 47वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस (All India Police Science Congress 2019) के शुक्रवार को समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने आइपीसी, सीआरपीसी में संशोधन का मसौदा तैयार कर गृह मंत्रालय को भेज दिया है, लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं है। ऐसे कानून सौ-डेढ़ सौ वर्षों में एक बार बदले जाते हैं।

इन कानूनों को आधुनिक संदर्भों में सरल, सुचारु और लोकाभिमुख कैसे बनाया जाए, इसके लिए प्रत्येक राज्य पुलिस महानिदेशक से लेकर बीट कांस्टेबल तक इस पर मंथन कर गृह मंत्रालय को अपने सुझाव दे। इन कानूनों में बदलाव के मसौदे को वेबसाइट पर सार्वजनिक भी किया जाएगा। कानून के विशेषज्ञों के सुझाव भी लिए जाएंगे।पेशेवर और प्रशिक्षित पुलिस कार्मिकों की कमी को दूर करने के लिए शाह ने देश में एक रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना करने की भी घोषणा की जिसके लिए केंद्र सरकार विधेयक लाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में पुलिस विश्वविद्यालय नहीं है, वहां इस विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज स्थापित किया जाएगा। कक्षा दस उत्तीर्ण कर चुके जो बच्चे पुलिसिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वे इस विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में पढ़ सकते हैं। इस विश्वविद्यालय में फोरेंसिक साइंस, कानून, अभियोजन, विवेचना और पुलिस थानों के संचालन की पढ़ाई होगी। जो छात्र यहां से पढ़कर निकलेंगे उन्हें पुलिस भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी क्योंकि वे ‘रेडीमेड मैटीरियल’ होंगे।