108 फिट ऊंची हनुमान प्रतिमा को एयरलिफ्ट करने की तैयारी में हाईकोर्ट

नई दिल्ली — दिल्ली की पहचान बन चुकी झंडेवालान में लगी हनुमान की 108 फिट की विशाल प्रतिमा को हटाया जा सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल दिल्ली में अतिक्रमण हटाने के लिए करोल बाग में लगी 108 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को एयरलिफ्ट करने पर विचार करने के लिए कहा है. बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि “करोल बाग और झंडेवालान के बीच करीब डेढ़ दशक पुरानी 108 फुट ऊंची हनुमान की मूर्ति को एयरलिफ्ट किया जा सकता है या नहीं. इस पर सिविक एजेंसिया और एमसीडी अपनी रिपोर्ट दे. इस बारे में उपराज्यपाल से भी मीटिंग

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November 21, 2017

नई दिल्ली — दिल्ली की पहचान बन चुकी झंडेवालान में लगी हनुमान की 108 फिट की विशाल प्रतिमा को हटाया जा सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल दिल्ली में अतिक्रमण हटाने के लिए करोल बाग में लगी 108 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को एयरलिफ्ट करने पर विचार करने के लिए कहा है.

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि “करोल बाग और झंडेवालान के बीच करीब डेढ़ दशक पुरानी 108 फुट ऊंची हनुमान की मूर्ति को एयरलिफ्ट किया जा सकता है या नहीं. इस पर सिविक एजेंसिया और एमसीडी अपनी रिपोर्ट दे. इस बारे में उपराज्यपाल से भी मीटिंग करें.”

दरअसल जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरिशंकर की बेंच ने कहा है कि अमेरिका में कई गगनचुंभी इमारतों को अपनी जगह से हटाकर दूसरी जगह री-लोकेट किया जा चुका है, ऐसा भारत में भी किया जा सकता है. बेंच ने प्रशासन से कहा कि वे हनुमान मूर्ति को एयरलिफ्ट करने के बारे में विचार करें और इसके लिए उपराज्यपाल से बात करें. हाई कोर्ट की ओर से यह सुझाव उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें करोल बाग इलाके में अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को हटाने का निर्देश देने की मांग की गई है.

वहीं मंदिर के महंत कहा कि अतिक्रमण और ट्रैफिक की और भी दूसरी वजहें है सिर्फ मंदिर नहीं. हम कोर्ट से अपील करते है समस्या का कोई दूसरा विकल्प ढूढ़े मंदिर शिफ्ट करना कोई विकल्प नहीं.करोल बाग में जो पार्किंग होती है उससे भी ट्रैफिक होता उसे हटाने की बात सोचनी चाहिए.

यह मंदिर बहुत पुराना है यह आस्था से जुड़ा मामला है ऐसे इसे नहीं हटाया जा जासकता. महंत के मुताबिक इस मंदिर का इतिहास तकरीबन 150 साल पुराना है.जो 1994 में महंत नागा बाबा सेवा गिरी जी महाराज के द्वारा शुरू किया गया और यह प्रतिमा 2007 में बन कर तैयार हुई है.