‘धुरंधर 2’ में अतीक अहमद के ISI कनेक्शन की क्यों हो रही चर्चा, गरमाई यूपी की सियासत

Dhurandhar 2: बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म, धुरंधर: द रिवेंज रिलीज के बाद से ही सिनेमाघरों में धूम मचा रही है। फिल्म में कई ऐसे खुलासे किए गए हैं, जिसे देखकर मन में कई सवाल खड़े हो रहे है। फिल्म में ना सिर्फ नोटबंदी, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड का जिक्र किया गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश के पूर्व बाहुबली नेता अतीक अहमद को लेकर चौंकाने वाले पहलुओं को दिखाया गया है। हालांकि फिल्म अतीक अहमद को लेकर किए गए दावों के बाद यूपी में सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। फिल्म देखने के बाद यूज़र्स यह दावा

Written By :

SK Sharma

Updated

March 19, 2026

Dhurandhar 2 Box Office Collection

Dhurandhar 2: बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म, धुरंधर: द रिवेंज रिलीज के बाद से ही सिनेमाघरों में धूम मचा रही है। फिल्म में कई ऐसे खुलासे किए गए हैं, जिसे देखकर मन में कई सवाल खड़े हो रहे है। फिल्म में ना सिर्फ नोटबंदी, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड का जिक्र किया गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश के पूर्व बाहुबली नेता अतीक अहमद को लेकर चौंकाने वाले पहलुओं को दिखाया गया है। हालांकि फिल्म अतीक अहमद को लेकर किए गए दावों के बाद यूपी में सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। फिल्म देखने के बाद यूज़र्स यह दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार का नोटबंदी का फ़ैसला बिल्कुल सही था।

फिल्म में अतीक अहमद का क्या है कनेक्शन

गुरुवार को रिलीज हुई फ़िल्म के धुरंधर के कई सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसमें चर्चा का मुख्य केंद्र यूपी के पूर्व बाहुबली नेता अतीक अहमद हैं। फ़िल्म के अनुसार, अतीक अहमद उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान की ISI और लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन से ‘पाकिस्तान-समर्थित सरकार’ बनाने की साज़िश में शामिल था। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर काफी कुछ लिखा गया है।

दरअसल फिल्म में एक ऐसा किरदार है, जो देखने में बिल्कुल अतीक अहमद जैसा लगता है। हालांकि फ़िल्म में अतीक अहमद का नाम साफ तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन फैन्स ने ‘आतिफ अहमद’ के किरदार को उन्हीं पर आधारित माना है। इस किरदार की शारीरिक बनावट और उसके आस-पास बुनी गई कहानी, दोनों ही अतीक अहमद के असल जीवन की घटनाओं से काफी मिलती-जुलती हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आतिफ अहमद के किरदार का अंत भी ठीक उसी तरह होता है, जिस तरह असल जिदगी में अतीक अहमद का हुआ था।

हथियारों की सप्लाई

फ़िल्म में आतिफ़ अहमद को मेडिकल जांच के लिए जाते हुए दिखाया गया है; वह मीडिया से कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे के जनाज़े में शामिल होने की इजाज़त नहीं मिली और ठीक इसके बाद ही, उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाई जाती हैं। यह फ़िल्म आतिफ अहमद और मेजर इक़बाल (अर्जुन रामपाल द्वारा अभिनीत) के बीच एक गहरे जुड़ाव को दिखाती है। मेजर इक़बाल वह व्यक्ति है जो नकली नोटों और हथियारों की सप्लाई में शामिल है। फ़िल्म में आतिफ को नोटबंदी की घोषणा के बाद मेजर इकबाल से बातचीत करते हुए दिखाया गया है।

यूजर्स बोले- प्रोपेगैंडा

फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स का तर्क है कि इस आधार पर नोटबंदी लागू करने का फैसला पूरी तरह से सही था, क्योंकि अतीक अहमद के कथित तौर पर पाकिस्तान से संबंध थे। फिल्म देखने के बाद कुछ यूज़र्स ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं, और पूछा है कि पूरे राज्य में इतनी बड़े पैमाने पर हथियार और नकली नोटों की सप्लाई कैसे हो रही है। इसके विपरीत, कुछ यूज़र्स ने इस फ़िल्म को प्रोपेगैंडा करार दिया है।

फिल्म को लेकर यूपी में शुरू हुई बयानबाजी

इस बीच, इस फ़िल्म ने उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक तूफ़ान भी खड़ा कर दिया है। फ़िल्म धुरंधर 2 को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ होती दिख रही है। यह विवाद तब और गहरा गया जब समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और कांग्रेस के सांसद तारिक अनवर ने फिल्म की कहानी और उसके पीछे के मक़सद पर सवाल उठाए। विशेष रूप से, विपक्ष ने इस फिल्म की निंदा करते हुए इसे प्रोपेगैंडा बताया है, क्योंकि इसमें उत्तर प्रदेश के एक पूर्व बाहुबली नेता अतीक़ अहमद को ISI और विभिन्न आतंकवादी संगठनों से जुड़ा हुआ दिखाया गया है।

SP सांसद राजीव राय ने कहा कि उन्होंने यह फ़िल्म नहीं देखी है, लेकिन यह झूठे लोगों की मनगढ़ंत कहानी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर फ़िल्में बनाई जाती हैं, और इसमें PM और सरकार मदद करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फ़िल्में जान-बूझकर चुनावों के आस-पास रिलीज़ की जाती हैं ताकि माहौल को प्रभावित किया जा सके।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस फ़िल्म पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि अतीक़ अहमद की छवि जैसी भी हो, उसे ISI या आतंकवादी संगठनों से जोड़ना बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना है। उन्होंने इस फ़िल्म को BJP के एजेंडे पर आधारित प्रोपेगैंडा बताया। उन्होंने फ़िल्म को सेंसर बोर्ड से मिली मंज़ूरी पर भी सवाल उठाए।



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