Corona: एक ऐसा अनूठा फेस मास्क जो वायरस को ही खत्म कर देगा

दिल्ली–कोरोना (corona) के संक्रमण से बचने के लिए जहां अब मास्क पहनना जरूरी हो गया है, वहीं कोरोना के खिलाफ जंग छेड़े भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनूठा मास्क तैयार किया है, जो न सिर्फ कोरोना के संक्रमण से बचाव करेगा, बल्कि संपर्क में आने पर वायरस को भी नष्ट देगा। यह भी पढ़ें-आज रात एक सीधी रेखा में देखे जा सकेंगे चन्द्रमा, मंगल, शनि व बृहस्पति यह बाजार में उपलब्ध दूसरे मास्क की तुलना में काफी किफायती भी है। इसकी अधिकतम लागत 45 रुपए के आस-पास है। इसे डाक्टरों और कोरोना corona संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वालों

Written By :

Shweta Singh

Updated

April 17, 2020

दिल्ली–कोरोना (corona) के संक्रमण से बचने के लिए जहां अब मास्क पहनना जरूरी हो गया है, वहीं कोरोना के खिलाफ जंग छेड़े भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनूठा मास्क तैयार किया है, जो न सिर्फ कोरोना के संक्रमण से बचाव करेगा, बल्कि संपर्क में आने पर वायरस को भी नष्ट देगा।

यह भी पढ़ें-आज रात एक सीधी रेखा में देखे जा सकेंगे चन्द्रमा, मंगल, शनि व बृहस्पति

यह बाजार में उपलब्ध दूसरे मास्क की तुलना में काफी किफायती भी है। इसकी अधिकतम लागत 45 रुपए के आस-पास है। इसे डाक्टरों और कोरोना corona संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वालों के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है।

सीएसएमसीआरआई द्वारा किया गया विकसित-

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के भावनगर( गुजरात) स्थित केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान( सीएसएमसीआरआई) की ओर से विकसित किए गए इस खास मास्क को संशोधित पॉलीसल्फोन मैटेरियल से बनाया गया है। जिसकी मोटाई 150 माइक्रोमीटर है। यह 60 नैनोमीटर या उससे बड़े किसी भी वायरस को नष्ट कर सकता है। यहां बता दें कि कोराना (corona) वायरस का व्यास 80 से 120 नैनोमीटर के बीच है। ऐसे में यह इस मास्क से बच नहीं सकेगा।

वायरस, फंगल एवं बैक्टीरिया प्रतिरोधी-

सीएसएमसीआरआई के मेम्ब्रेन साइंस एंड सेप्रेशन टेक्नालॉजी विभाग के प्रमुख डॉ वी के शाही के मुताबिक इस मास्क (corona) की बाहरी परत वायरस, फंगल एवं बैक्टीरिया प्रतिरोधी है। उनका दावा है कि इसकी बाहरी परत के संपर्क में आने पर कोई भी रोगजनित सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकता है। इस लिहाज से यह अब तक सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एन-95 मास्क से भी बेहतर साबित हो सकता है। वहीं इसे धोकर दोबारा भी उपयोग में लाया जा सकता है।

पांच अलग-अलग तरीकों से विकसित किया गया-

सीएसआईआर को भेजी अपनी रिपोर्ट में डा शाही ने बताया है कि फिलहाल इस मास्क को पांच अलग-अलग तरीकों से विकसित किया गया है। साथ ही उनमें अलग-अलग तरह की झिल्लियों की भी इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि कोरोना (corona) संकट के सामने आने के बाद सीएसआईआर के जुड़े देश भर के संस्थानों ने अपने-अपने स्तर पर इससे निपटने के तरीकों को लेकर काम शुरु किया था। इस दौरान भावनगर स्थित इस संस्थान ने मास्क तैयार करने का काम हाथ में लिया था। करीब एक हफ्ते के भीतर संस्थान ने इस मास्क को तैयार किया है। फिलहाल इसे अब इस्तेमाल की अनुमति के आईसीएमआर को भेजा गया है। जिसकी अनुमति आते ही इसे तैयार करने का काम तेजी से शुरु कर दिया जाएगा।