महिला हो कुछ जानती हो.. चुपचाप सुनो ? बिहार विधानसभा में CM नीतीश ने खोया आपा

पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। विपक्षी सदस्य आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने खड़े होकर कहा कि आपकी जो भी मांग है, वह पूरी हो चुकी है, इस पर हंगामा करने का कोई मतलब नहीं है। आरजेडी की महिला विधायक पर भड़के नीतीश दरअसल विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने बार-बार उनसे अपने स्थान पर जाकर बोलने का आग्रह किया।

Written By :

SK Sharma

Updated

July 24, 2024

पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। विपक्षी सदस्य आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने खड़े होकर कहा कि आपकी जो भी मांग है, वह पूरी हो चुकी है, इस पर हंगामा करने का कोई मतलब नहीं है।

आरजेडी की महिला विधायक पर भड़के नीतीश

दरअसल विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने बार-बार उनसे अपने स्थान पर जाकर बोलने का आग्रह किया। लेकिन, विपक्ष हंगामा करता रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री भी नाराज होते दिखे। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का गुस्सा इतना भड़क गया कि उन्होंने आरजेडी की महिला विधायक को भी फटकार लगा दी।

आरक्षण को 9वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रही आरजेडी विधायक रेखा देवी को फटकार लगाते हुए कहा कि अरे तुम महिला हो, कुछ जानती नहीं हो, कहां से आते हैं, इन लोगों ने कुछ किया है क्या? हम ही हैं जिन्होंने 2005 के बाद महिलाओं को आगे बढ़ाया है। बोल रही हो, फालतू बात…उन्होंने यहां तक ​​कहा कि चुपचाप सुन लीजिए, हम अभी बोल रहे हैं।

विपक्ष पर जमकर साधा निशाना

वहीं सदन में विपक्षी विधायकों के ‘हाय हाय’ के नारे लगाने पर नीतीश कुमार खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि आप सब हाय हाय हैं। अगर आप हमारी बात नहीं सुनना चाहते हैं तो यह आपकी गलती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खड़े होकर कहा कि सरकार ने जातिगत जनगणना के बाद आरक्षण की सीमा पहले ही बढ़ा दी है। पटना हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।

सरकार ने इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है। इसके बाद इस मामले पर हंगामा करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना के बाद 94 लाख गरीबों की पहचान की गई है। सरकार ने उनके विकास के लिए दो-दो लाख रुपये देना शुरू कर दिया है।