भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने ने छोड़ी भाजपा, अभी नही खोले पत्ते !

बहराइच— अपने विवादित बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाली बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने बीजेपी पर समाज को बांटने का आरोप लगाते कहा कि भारतीय जनता पार्टी में दलित सांसद होने के कारण मेरी बातों को अनसुना किया गया. इसलिए आहत होकर मैं इस्तीफा दे रही हूं. उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की कोशिश की जा रही है. संविधान को खत्म करने की योजना बनाई जा रही है. इस्तीफे के साथ ही 23 दिसंबर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में महारैली का ऐलान भी

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December 6, 2018

बहराइच— अपने विवादित बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाली बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

उन्होंने बीजेपी पर समाज को बांटने का आरोप लगाते कहा कि भारतीय जनता पार्टी में दलित सांसद होने के कारण मेरी बातों को अनसुना किया गया. इसलिए आहत होकर मैं इस्तीफा दे रही हूं.

उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की कोशिश की जा रही है. संविधान को खत्म करने की योजना बनाई जा रही है. इस्तीफे के साथ ही 23 दिसंबर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में महारैली का ऐलान भी कर दिया. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान की रक्षा के लिए लखनऊ की रैली में बड़ा धमाका करेंगी. संविधान और आरक्षण के आंदोलन को अब वे आगे बढ़ाएंगी.हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे सांसद के पद से इस्तीफा नहीं देंगी.

वहीं भाजपा पर जमकर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी देश का विकास न करके मंदिर और मूर्तियां बना रही है. अल्पसंख्यक को प्रताड़ित किया जा रहा है. इतना ही नहीं बाबा साहब की मूर्ति तोड़ी गई, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. 

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से सावित्री बाई फुले लगातार पार्टी और अपनी सरकार पर हलवार थीं. उन्होंने आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर भी मोर्चा खोला था. वह लगातार अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में भी थीं. नानपारा इलाके से दो बार लगातार जिला पंचायत सदस्य चुनी गयी सावित्री ने बसपा से राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी. बसपा में उन्हे कोई सफलता हासिल नही हुई.  2002 वो भाजपा में शामिल हुयी और चर्दा विधानसभा से चुनाव लड़ा ,लेकिन उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा इसके  बाबजूद उन्हें पार्टी ने दूसरी बार विधानसभा बलहा से 2007 में चुनाव में प्रत्याशी बनाया. उन्हे चुनाव में फिर असफलता हाथ लगी. इसके बाद सावित्री ने अपने नाम के आगे साध्वी लगाना शुरू कर दिया. तीसरी बार पार्टी ने उन्हे 2012 में बलहा से प्रत्याशी बनाया.  इस बार वह विधायक चुनी गयी. 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने दिग्गज उम्मीदवारों को दरकिनार कर बहराइच सुरक्षित संसदीय इलाके से प्रत्याशी बनाया. मोदी लहर मे वह रिकार्ड मतो से जीत गयी. 2017  के अंतिम दौर मे उन्होने दलित कार्ड खेलते हुए भाजपा विरोधी बयानवाजी कर पार्टी नेतृत्व के सामने मुश्किल खड़ी करना शुरू कर दी.

गुरूवार को लखनऊ में डा. भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वण दिवस पर नमो बुद्धाय जन सेवा समिति के कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा समाज मे विभाजन पैदा कर रही है. इसी वजह से वह भाजपा छोड़ रही है.

(रिपोर्ट-अनुराग पाठक, बहराइच)