समलैंगिकताः सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर करण जौहर ने जाहिर की खुशी

मनोरंजन डेस्क — समलैंगिकता को अवैध बताने वाली IPC की धारा 377 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने एक मत से सुनाए गए फैसले में दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को मनमाना और अतार्किक बताते हुए निरस्त किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद समाज के अलग-अलग तबकों के साथ बॉलिवुड ने भी खुशी

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September 6, 2018

मनोरंजन डेस्क — समलैंगिकता को अवैध बताने वाली IPC की धारा 377 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने एक मत से सुनाए गए फैसले में दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को मनमाना और अतार्किक बताते हुए निरस्त किया है.

वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद समाज के अलग-अलग तबकों के साथ बॉलिवुड ने भी खुशी जाहिर की है। इस लिस्ट में बॉलिवुड के जाने-माने प्रड्यूसर करण जौहर भी शामिल हैं। उन्होंने ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘ऐतिहासिक फैसला, आज मुझे बहुत गर्व है। होमोसेक्शुऐलिटी को अपराध न मानना और 377 को को रद्द करना मानवता और समान अधिकारों की बड़ी जीत है। इस देश को दोबारा सांस लेने का मौका मिला है।

समलैंगिकता के फैसले के बाद एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी ट्वीट किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पिटिशन दर्ज करने वाले और इससे जुड़े एक्टिविस्ट को बधाई दी. स्वरा ने कहा- भारत अब ऐसा आजाद देश हो गया है, जहां हर वर्ग के लोग रह सकते हैं.

बता दें कि फैसला सुनाते हुए जजों ने कहा कि संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है। जीवन का अधिकार मानवीय अधिकार है। इस अधिकार के बिना बाकी अधिकार औचित्यहीन हैं। कोर्ट ने अपने फैसले में सेक्शुअल ओरिएंटेशन बायलॉजिकल बताया है। कोर्ट का कहना है कि इस पर किसी भी तरह की रोक संवैधानिक अधिकार का हनन है। किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह एलजीबीटी कम्युनिटी के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं। एक-दूसरे के अधिकारों को सम्मान करना चाहिए। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को आंशिक तौर पर खत्म करते हुए दो बालिगों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ किया कि धारा 377 के तहत अब बिना सहमति के समलैंगिक संबंध बनाना अपराध होगा, लेकिन सहमति से संबंध अपराध नहीं। कोर्ट ने कहा कि बच्चों और जानवरों से अप्राकृतिक संबंध अब भी अपराध रहेगा।