जेल में बंद कातिल मुस्कान की सरकारी वकील की मांग, कहा- मां-बाप नहीं लड़ेंगे मेरा केस

Meerut Murder Case: दिल दहला देने वाली हत्या के बाद आरोपी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी अब जेल में दिन काट रहे हैं। बताया गया कि जेल में भी उन्हें नशे की तलब लगी रही। वे खाना भी नहीं खा रहे हैं। जेल प्रशासन ने उन्हें नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए दवाइयों और काउंसलिंग का सहारा लिया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि उन्हें अलग-अलग बैरक में रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुस्कान का परिवार केस लड़ने को तैयार नहीं है, इसलिए सरकारी वकील के लिए कोर्ट को पत्र लिखा गया है।

Written By :

SK Sharma

Updated

March 23, 2025

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Meerut Murder Case: दिल दहला देने वाली हत्या के बाद आरोपी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी अब जेल में दिन काट रहे हैं। बताया गया कि जेल में भी उन्हें नशे की तलब लगी रही। वे खाना भी नहीं खा रहे हैं। जेल प्रशासन ने उन्हें नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए दवाइयों और काउंसलिंग का सहारा लिया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि उन्हें अलग-अलग बैरक में रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुस्कान का परिवार केस लड़ने को तैयार नहीं है, इसलिए सरकारी वकील के लिए कोर्ट को पत्र लिखा गया है।

मुस्कान और साहिल साथ में रहने की कर रहे थे मांग

जेल अधीक्षक ने बताया, मुस्कान और साहिल को तीन दिन पहले जेल लाया गया था। आते ही वे कहने लगे कि उन्हें पास की बैरक में रखा जाए। हालांकि, साफ तौर पर बताया गया कि जेल में जो व्यवस्था है, उसके मुताबिक पुरुष और महिला बैरक में संपर्क नहीं हो पाता। ऐसे में दोनों को अलग-अलग रखा गया है। जब भी कोई कैदी आता है तो उसके स्वास्थ्य की जांच की जाती है। पता चला कि वे नशे के आदी हैं। जेल में नशा नहीं मिल सकता। उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं।

Meerut Murder Case: नशा मुक्ति केंद्र में हो रही काउंसलिंग

नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से उनकी काउंसलिंग की जा रही है और योग व ध्यान कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास है कि आम कैदी उनसे दूर रहें और बार-बार उनके केस के बारे में न पूछें। उन्होंने बताया कि मुस्कान ने मुझसे मिलने की इच्छा जताई थी। मैंने उसे फोन किया तो उसने कहा कि उसके घरवाले उससे नाराज हैं। वे केस नहीं लड़ेंगे। ऐसे में उसे सरकारी वकील मुहैया कराया जाए। इस संबंध में कोर्ट को पत्र भेजा जा रहा है। वकील लेना कैदी का अधिकार है और इसके लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि उन लोगों को जेल की व्यवस्था नहीं पता थी। पुरुष और महिला बैरक में आधा किलोमीटर का अंतर है। जब उन्हें समझाया गया तो वे मान गए।

नशे के लिए तड़प रहे दोनों

उन्होंने बताया कि वे नशे की मांग नहीं कर रहे थे। हालांकि डॉक्टरों ने बताया कि वे नशे के आदी हैं। जो लंबे समय से नशा कर रहे हैं, उन्हें दवा दी जाती है। धीरे-धीरे उनमें सुधार हो रहा है। 10 से 15 दिन में उनकी नशे की आदत छूट जाएगी। उन्होंने बताया कि साहिल ने अभी सरकारी वकील के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा था कि परिवार के लोग केस लड़ेंगे और अगर नहीं लड़ेंगे तो इसकी जानकारी दी जाएगी।


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