Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने फिर से उठाया बैलेट पेपर का मुद्दा

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर से बैलेट पेपर का मुद्दा उठाया। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि चंडीगढ़ में हुए चुनाव में बैलेट पेपर से वोट पड़े तो हेराफेरी का पता चला। जो मशीन से वोट पड़ा होता तो कहां से कोई देख पाता।

Written By :

SK Sharma

Updated

February 23, 2024

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर से बैलेट पेपर का मुद्दा उठाया। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि चंडीगढ़ में हुए चुनाव में बैलेट पेपर से वोट पड़े तो हेराफेरी का पता चला। जो मशीन से वोट पड़ा होता तो कहां से कोई देख पाता।

अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जो सरकार किसानों को दुखी करे, नौजवानों की नौकरी-रोजगार छीन ले, वह राष्ट्रवादी सरकार नहीं हो सकती है। प्रदेश में नौजवान सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। हर जगह से शिकायत आ रही है कि पेपर लीक हुआ है। प्रयागराज में आयोग को घेरकर छात्र बैठे हुए हैं। आखिरकार सरकार का हर पेपर लीक क्यों हो रहा है? क्या सरकार ऐसा जानबूझकर तो नहीं कर रही है?

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उन्होंने सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर कहा कि गठबंधन भी ठीक हुआ है और सीटों का बंटवारा भी ठीक हुआ है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की जनता बल्कि देश की जनता भाजपा को हटाने का काम करेगी। हमारे गठबंधन की सरकार बनेगी।

गठबंधन से कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी, सपा को होगा नुकसान !

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन तो हो गया है, लेकिन दोनों पार्टियां एक-दूसरे का वर्चस्व मानने को तैयार नहीं हैं। इस गठबंधन में भले ही कांग्रेस को कम सीटें मिली हों, लेकिन शून्य की ओर बढ़ रही कांग्रेस को इससे फायदा होने की उम्मीद है।

गठबंधन न होने की स्थिति में भी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट सपा को ही जाता। ऐसे में अगर गठबंधन होता है तो इसका फायदा कांग्रेस को भी होगा। अगर कांग्रेस कुछ सीटें भी हासिल करने में सफल रही तो अगले चुनाव में मुस्लिम वोटों को अपनी ओर मोड़ने में कामयाब हो सकती है। साथ ही समाजवादी पार्टी का जनाधार घटने की संभावना बढ़ जाएगी।

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्द्धन त्रिपाठी का कहना है कि जब बसपा और सपा के गठबंधन में भाजपा को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक मरती हुई पार्टी है। ऐसे में इस गठबंधन का कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। इससे सिर्फ कांग्रेस को ही संजीवनी मिल सकती है, जिससे वह उत्तर प्रदेश में सांस ले सके।

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