योगी आदित्यनाथ ने शपथ ग्रहण कर रचा इतिहास, जानिए कितने सालों बाद किसी मुख्यमंत्री की सत्ता में दोबारा हुई वापसी

योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में शपथ ग्रहण कर लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन सूबे की सत्ता सम्हालेंगे। वहीं शपथ समारोह कार्यक्रम में पीएम मोदी समते 50 हजार से अधिक मेहमानों की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने योगी को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। वहीं योगी सरकार में केवल एक इकलौते मुस्लिम मंत्री होंगे।  आइये आपको बताते हैं वो कौन है? बता दें कि इस बार योगी सरकार के संभावित मंत्रियों में इकलौते मुस्लिम मंत्री दानिश आजाद अंसारी हैं।  दानिश बलिया से लंबे समय से राजनीति में है।  इतना ही नहीं

Written By :

Anjali Tripathi

Updated

March 25, 2022

योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में शपथ ग्रहण कर लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन सूबे की सत्ता सम्हालेंगे। वहीं शपथ समारोह कार्यक्रम में पीएम मोदी समते 50 हजार से अधिक मेहमानों की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने योगी को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। वहीं योगी सरकार में केवल एक इकलौते मुस्लिम मंत्री होंगे।  आइये आपको बताते हैं वो कौन है?

बता दें कि इस बार योगी सरकार के संभावित मंत्रियों में इकलौते मुस्लिम मंत्री दानिश आजाद अंसारी हैं।  दानिश बलिया से लंबे समय से राजनीति में है।  इतना ही नहीं उन्हें सीएम योगी का बेहद करीबी भी माना जाता है।  दरअसल, दानिश बलिया के एबीवीपी में कार्यकर्ता रहे है।  वहीं आजाद की शुरुआती पढ़ाई बलिया से ही हुई है जबकि ग्रेजुएशन लखनऊ से किया है।  अब दानिश योगी सरकार का संभावित मुस्लिम चेहरा हैं।

37 साल बाद हुई किसी मुख्यमंत्री की हुई सत्ता में वापसी:

पिछले 37 साल में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करने वाले योगी आदित्यनाथ पहले मुख्यमंत्री हैं। बता दें कि 1985 में कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी ने यह कारनामा किया था। वह अविभाजित यूपी के सीएम थे और लगातार दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं एनडी तिवारी के कार्यकाल के बाद सीएम योगी ने ही सत्ता में वापसी करने में कामयाब हो पाए है।

इतने सालों बाद विधायक बने मुख्यमंत्री:

15 साल बाद यूपी में विधानसभा का कोई सदस्य मुख्यमंत्री बना है। वही सीएम योगी आदित्यनाथ पिछले कार्यकाल में जब मुख्यमंत्री बने थे तो उस दौरान वह लोकसभा के सदस्य थे। लोकसभा की सदस्यता छोड़ने के बाद वह विधान परिषद के सदस्य बने थे। दूसरी तरफ योगी से पहले अखिलेश यादव और मायावती भी एमएलसी के रूप में ही मुख्यमंत्री बन चुके है।

 

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