Army कोर्ट के पूर्व महामंत्री ने सरकार से की ये मांग….

लखनऊ: सेना (Army) कोर्ट लखनऊ के पूर्वमहामंत्री अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने कोरोना आपातकाल के बीच राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की कि इस आपदा से निजात पाने के बाद व्यवसायिक गतिविधियों पर आत्म-निर्भर वर्ग अपनी भुगतान क्षमता खो चुका होगा उसके समक्ष देनदारियों के भुगतान की चुनौती होगी। यह भी पढ़ें-Lockdown नहीं होने पर भारत में इटली जैसे होते हालात, ICMR की रिसर्च में खुलासा जिसमें उसे अपनी आजीविका के साधनों की सुरक्षा करनी होगी, परिवार के भरण-पोषण का उत्तरदायित्व भी होगा। Army कोर्ट के पूर्वमहामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने कहा

Written By :

Shweta Singh

Updated

April 12, 2020

लखनऊ: सेना (Army) कोर्ट लखनऊ के पूर्वमहामंत्री अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने कोरोना आपातकाल के बीच राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की कि इस आपदा से निजात पाने के बाद व्यवसायिक गतिविधियों पर आत्म-निर्भर वर्ग अपनी भुगतान क्षमता खो चुका होगा उसके समक्ष देनदारियों के भुगतान की चुनौती होगी।

यह भी पढ़ें-Lockdown नहीं होने पर भारत में इटली जैसे होते हालात, ICMR की रिसर्च में खुलासा

जिसमें उसे अपनी आजीविका के साधनों की सुरक्षा करनी होगी, परिवार के भरण-पोषण का उत्तरदायित्व भी होगा। Army कोर्ट के पूर्वमहामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि बच्चों का शिक्षण-शुल्क जमा करना होगा, नई कक्षाओं में प्रवेश की व्यवस्था बनानी होंगी और कापी-किताब की व्यवस्था करनी होगी; विद्युत्-शुल्क (कृषक, घरेलू और व्यावसायिक), पानी का शुल्क, मकान का शुल्क, नगर-निगम के शुल्क, ऋण की किश्तें और जीवन बीमा की किश्तें इत्यादि भी जमा करनी होंगी l

Army कोर्ट के पूर्वमहामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि ऐसी विषम परिस्थिति में यह वर्ग आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बिखराव का शिकार बन जाएगा जो हमारे सामजिक स्वरूप को अस्थिर कर देगा जो हमारी सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के प्रतिकूल होगा Army कोर्ट के पूर्वमहामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि इसलिए शिक्षण, विद्युत् (कृषक, घरेलू और व्यावसायिक), पानी, नगर-निगम के शुल्क और मकान का शुल्क माफ़ कर दिया जाए और बैंक और बीमा इत्यादि की देनदारियों से यथोचित राहत प्रदान की जाए जिससे समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को सामजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से टूटने और बिखरने से बचाया जा सके l