मनमोहन पर मोदी की टिप्पणी को लेकर संसद में विपक्ष का हंगामा

नई दिल्ली– गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। नरेंद्र मोदी की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ टिप्पणी को लेकर मंगलवार को लोकसभा में हंगामा हुआ। इसके चलते सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। लोकसभा में जहां दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। वहीं राज्यसभा में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के लगाए गए आरोपों को लेकर सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस नेता गुलाम नबी

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December 19, 2017

नई दिल्ली– गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। नरेंद्र मोदी की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ टिप्पणी को लेकर मंगलवार को लोकसभा में हंगामा हुआ। इसके चलते सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में जहां दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। वहीं राज्यसभा में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के लगाए गए आरोपों को लेकर सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की ईमानदारी और देशभक्ति पर सवाल खड़े किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आएं और इन आरोपों को सिद्ध करें। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वो विपक्ष के नेता समेत अपने सभी सहयोगियों को चर्चा के लिए बुलाएंगे और इस मुद्दे का समाधान करने की कोशिश करेंगे। 

आपको बता दें कि गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिशंकर अय्यर के घर हुई एक बैठक को मुद्दा बनाते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के साथ मिलकर भाजपा को गुजरात चुनाव हराने की साजिश रची जा रही है। इसे लेकर मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनाव जीतने के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पीएम नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग कर रही है। इस बात के कयास पहले से ही लगाए गए थे कि शीतकालीन सत्र पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों का भी असर पड़ेगा। चुनाव के कारण करीब एक महीना देर से बुलाए गए इस सत्र की अवधि थोड़ी कम ही होगी। पिछले शीतकालीन सत्र के 21 दिवसीय कामकाज के मुकाबले इस सत्र में 14 दिन ही कामकाज होगा। इस सत्र में सरकार पर हमला करने के लिए विपक्ष अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र की बदतर हालत, जीएसटी और प्रवर्तन एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठा सकता है।