खुले आसमान में सड रहा गरीबों का निवाला,अधिकारी नहीं ले रहे सुध

एटा — जनपद एटा के निधौलीकला स्थित खाद्य विभाग के एसएमआई गोदाम का इस समय बुरा हाल है। सरकारी गोदाम में गरीबों को वितरित किए जाने वाला गेहूं, चावल का भंडारण किया जाता है। लेकिन यहां के कर्मचारियों की अनदेखी तो देखिए गरीबों को वितरित किए जाने वाले गेहूं चावल को खुले आसमान के नीचे ही डाल दिया गया है जबकि बारिश का मौसम है खुले में पड़ा हुआ है, जहा ये गरीबों का बनने वाला निवाला गेहूं और चावल सड़ने को मजबूर है। दरअसल आपको बता दें कि जहां एक ओर चारों तरफ महंगाई की मार है महंगाई के

Written By :

SK Sharma

Updated

December 13, 2019

एटा — जनपद एटा के निधौलीकला स्थित खाद्य विभाग के एसएमआई गोदाम का इस समय बुरा हाल है। सरकारी गोदाम में गरीबों को वितरित किए जाने वाला गेहूं, चावल का भंडारण किया जाता है। लेकिन यहां के कर्मचारियों की अनदेखी तो देखिए गरीबों को वितरित किए जाने वाले गेहूं चावल को खुले आसमान के नीचे ही डाल दिया गया है जबकि बारिश का मौसम है खुले में पड़ा हुआ है, जहा ये गरीबों का बनने वाला निवाला गेहूं और चावल सड़ने को मजबूर है।

दरअसल आपको बता दें कि जहां एक ओर चारों तरफ महंगाई की मार है महंगाई के कारण गरीब अपनी रोजी रोटी पेट काट काट कर खा रहे हैं वही दूसरी ओर सरकार द्वारा गरीबों के लिए दिए जाने वाले राशन की स्थिति एटा में अब खराब हो चली है। दरअसल खाद्य विभाग द्वारा गरीबों को बांटे जाने वाले गेहूं चावल का भंडारण एसएम आई सरकारी गोदाम में किया जाता है। जहां से राशन डीलर आकर गरीबों को बांटने के लिए अपना अपना राशन कोटा लेकर जाते हैं। वही एसएम आई गोदाम के कर्मचारियों और प्रशासन की अनदेखी के कारण गरीबों के निवाले,हक पर डाका डाला जा रहा है इतना ही नहीं गेहूं व चावल का भंडार तो है लेकिन खुले में ही कर दिया गया है।

जबकि मौसम खराब के चलते वारिश का मौसम है। देखिए साहब सरकारी राशन की बे कादरी इतनी कि वहां पर मौजूद आवारा जानवर गरीबों को बांटे जाने वाले राशन को खा रहे हैं और नुकसान कर रहे हैं लेकिन खाद्य विभाग व प्रशासन को तनिक भी फर्क नहीं पड़ रहा है। जब वहां मौजूद एक कर्मचारी से बात की गई तो पहले तो वह कुछ भी बोलने से बचने लगा लेकिन बाद में कर्मचारी द्वारा बताया गया कि यहां तो ऐसे ही खुले में पड़ा रहता है।

अब जानवर नुकसान कर रहे हैं तो उन्हें तो नहीं रोका जा सकता बारिश से बचने के लिए हम लोग त्रिपाल डाल देते हैं जबकि वारिश में त्रिपाल पूरे तरह महफूज नही है और बारिश से भीगने पर राशन सड़ जाता है और फिर गरीबो के पेट को काटकर राशन की मात्रा कम हो जाती है या सड़ा हुआ गेंहू,चावल राशन लेने को मजबूर होते है। लेकिन भंडारण के लिए पक्के कक्ष में नहीं रखा जाता है।

(रिपोर्ट-आर.बी.द्विवेदी,एटा)