…जब गुस्से से तमतमा उठे थे पंडित जवाहरलाल नेहरू

लखनऊ–पंडित जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें बच्चे ‘चाचा नेहरू’ के नाम से भी जानते हैं का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। जवाहर लाल नेहरू कश्मीरी पंडित थे। इनको आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त था। बात उन दिनों की है जब पंडित जवाहरलाल नेहरू लखनऊ की सेंट्रल जेल में थे। लखनऊ सेंट्रल जेल में खाना तैयार होते ही मेज पर रख दिया जाता था। सभी सम्मिलित रूप से खाते थे। एक बार एक डायनिंग टेबल पर एक साथ सात आदमी खाने बैठे। तीन आदमी नेहरूजी की तरफ और चार आदमी दूसरी तरफ। एक पंक्ति में नेहरूजी

Written By :

Shweta Singh

Updated

November 14, 2019

लखनऊ–पंडित जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें बच्चे ‘चाचा नेहरू’ के नाम से भी जानते हैं का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। जवाहर लाल नेहरू कश्मीरी पंडित थे। इनको आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त था।

बात उन दिनों की है जब पंडित जवाहरलाल नेहरू लखनऊ की सेंट्रल जेल में थे। लखनऊ सेंट्रल जेल में खाना तैयार होते ही मेज पर रख दिया जाता था। सभी सम्मिलित रूप से खाते थे।

एक बार एक डायनिंग टेबल पर एक साथ सात आदमी खाने बैठे। तीन आदमी नेहरूजी की तरफ और चार आदमी दूसरी तरफ। एक पंक्ति में नेहरूजी थे और दूसरी में चंद्रसिंह गढ़वाली। खाना खाते समय शकर की जरूरत पड़ी। बर्तन कुछ दूर था चीनी का, चंद्रसिंह ने सोचा- ‘आलस्य करना ठीक नहीं है, अपना ही हाथ जरा आगे बढ़ा दिया जाए।’ चंद्रसिंह ने हाथ बढ़ाकर बर्तन उठाना चाहा कि नेहरूजी ने अपने हाथ से रोक दिया और कहा- ‘बोलो, जवाहरलाल शुगर पाट (बर्तन) दो।’

वे मारे गुस्से के तमतमा उठे। फिर तुरंत ठंडे भी हो गए और समझाने लगे- ‘हर काम के साथ शिष्टाचार आवश्यक है। भोजन की मेज का भी अपना एक सभ्य तरीका है, एक शिष्टाचार है। यदि कोई चीज सामने से दूर हो तो पास वाले को कहना चाहिए- ‘कृपया इसे देने का कष्ट करें।’ शिष्टाचार के मामले में नेहरूजी ने कई लोगों को नसीहत प्रदान की थी। ऐसे थे जवाहरलाल नेहरू।