गेरुआ नदी के तट पर 1350 नन्हें घड़ियालों ने खोली आंखें 

बहराइच — कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली गेरुआ नदी के टापू पर शुक्रवार शाम से देर रात तक घडियालों के सभी 32 नेस्ट खुल गए। इन घोसलों से 1350 नन्हे घडियाल निकले हैं। 500 घडियालों के घडियाल संरक्षण केंद्र के टैंक में सहेजकर शेष को गेरुआ नदी में छोड़ा गया है। बड़े पैमाने पर घडियालों के निकलने से वन विभाग के लोग गदगद हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मध्य से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन का कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद मानी जाती है। प्रति वर्ष मार्च माह के अंत

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June 17, 2019

बहराइच — कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली गेरुआ नदी के टापू पर शुक्रवार शाम से देर रात तक घडियालों के सभी 32 नेस्ट खुल गए।

इन घोसलों से 1350 नन्हे घडियाल निकले हैं। 500 घडियालों के घडियाल संरक्षण केंद्र के टैंक में सहेजकर शेष को गेरुआ नदी में छोड़ा गया है। बड़े पैमाने पर घडियालों के निकलने से वन विभाग के लोग गदगद हैं।

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मध्य से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन का कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद मानी जाती है। प्रति वर्ष मार्च माह के अंत से अप्रैल के अंत तक घड़ियाल और मगरमच्छ अंडे देते हैं। इन अंडों को नर और मादा घड़ियाल नदी के टापू में नेस्ट बनाकर सहेजते हैं। इस बार भी घड़ियाल द्वारा नेस्ट बनाने की प्रकिया अप्रैल माह के अंत तक चली थी। 

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि गेरुआ नदी में इस बार पांच स्थानों पर घड़ियाल और मगरमच्छ के 36 नेस्ट चिन्हित किए गए थे।

जून माह के प्रथम सप्ताह से नेस्ट खुलने की शुरुआत हुई थी। लेकिन शुक्रवार शाम से देर रात तक एकसाथ 32 नेस्ट खुले। इनमें 30 घड़ियालों के व दो मगरमच्छ के घड़ियालों के नेस्ट से 1350 के आसपास नन्हें घड़ियाल निकले हैं। डीएफओ ने बताया कि 500 नन्हें घड़ियालों को गेरुआ सफारी में स्थित घड़ियाल सेंटर के टैंक में सहेजा गया है। शेष घड़ियालों को गेरुआ नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। आसपास मौजूद मादा घड़ियालों के साथ नन्हें घड़ियाल नदी में तैरनेे लगे हैं।

(रिपोर्ट-अनुराग पाठक,बहराइच)