वेतन की राह ताक रहे 102 व 108 एम्बुलेंस के कर्मचारी, मीडिया को देख भागे कम्पनी के हेड एचआर

लखनऊ–दो महीनों से वेतन को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हजारों कर्मचारियों को एक बार फिर सेवा प्रदाता कम्पनी जीवीके ने झांसा दे दिया है। सोमवार को दो माह की तनख्वाह को लेकर जब 108 और 102 एम्बुलेन्स के कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करने जा रहे तब जीवीके कम्पनी के हेड एचआर आशीष शर्मा ने कर्मचारियों को आशियाना, कानपुर रोड़ स्थित जोनल पार्क में बुलाया और वित्तीय संकट का हवाला देते हुए आगामी 10 जनवरी तक इंतजार करने का कोरा आश्वासन थमा दिया। मौके पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को देखते ही आशीष शर्मा कैमरों से बचते हुए भाग निकले। जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग

Written By :

Shweta Singh

Updated

December 30, 2019

लखनऊ–दो महीनों से वेतन को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हजारों कर्मचारियों को एक बार फिर सेवा प्रदाता कम्पनी जीवीके ने झांसा दे दिया है।

सोमवार को दो माह की तनख्वाह को लेकर जब 108 और 102 एम्बुलेन्स के कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करने जा रहे तब जीवीके कम्पनी के हेड एचआर आशीष शर्मा ने कर्मचारियों को आशियाना, कानपुर रोड़ स्थित जोनल पार्क में बुलाया और वित्तीय संकट का हवाला देते हुए आगामी 10 जनवरी तक इंतजार करने का कोरा आश्वासन थमा दिया। मौके पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को देखते ही आशीष शर्मा कैमरों से बचते हुए भाग निकले। जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108-102 के रोषित एम्बुलेन्स कर्मचारियों ने वेतन को लेकर जम कर हंगामा काटा।

गौरतलब है कि प्रदेश के हजारों एम्बुलेन्स कर्मचारियों ने दो माह पहले राजधानी के ईको गार्डन में नियमित वेतन को लेकर बड़ा धरना प्रदर्शन किया था जिसके बाद जीवीके कम्पनी ने कर्मचारियों से समझौता कर लिया था लेकिन दो माह बीतने पर भी कम्पनी नियमित वेतन का भुगतान नहीं कर रही है।

उचित कार्यवाही का त्वरित निर्देश जारी करने की मांग करते हुए प्रदेश महामंत्री बृजेश कुमार ने कहा कि बायोमेट्रिक सिस्टम तकनीकी खामी होने पर कम्पनी से समझौता हुए ओवर टाईम वेतन का भुगतान न करना। सेलरी असमय व कटौतीपूर्ण देना। एम्बुलेन्स की संख्या के अनुसार कर्मचारियों की संख्या को पूर्ण न करना जिससे कर्मचारियों द्वारा मानक समय से अधिक ड्यूटी कराना। अधिकारियों द्वारा मौखिक रूप से फर्जी केस का दबाव बनाना। एम्बुलेन्स चलने की स्थिति में न होने पर भी केस कराने का दबाव बनाना। प्रदाता कम्पनी द्वारा भर्ती के नाम पर चालक से 25 हजार रूपये व मेडिकल टेक्नीशियन से 50 हजार रूपये की डीडी वसूल करना हैं।