कल होगा हरितालिका तीज व्रत, जानिए पूजन विधि,मुहूर्त और पूजन सामग्री

हिंदू धर्म में हरितालिका तीज व्रत का सुहागन महिलाओं के लिए बहुत ही ख़ास महत्व होता है। वही कुवांरी कन्यायें हरतालिका तीज व्रत सुयोग्य और मनचाहा वर प्राप्ति के लिए करती हैं। इस व्रत धार्मिक मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए उपवास रखा था और यह दिन उनके मिलन का प्रतीक है। इस व्रत में वे भगवान शिव और माता पार्वती की विधि –विधान से पूजा करती हैं। आइए आपको बताते हैं किस विधि-विधान से हरितालिका तीज व्रत में पूजा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के

Written By :

Anjali Tripathi

Updated

August 29, 2022

हिंदू धर्म में हरितालिका तीज व्रत का सुहागन महिलाओं के लिए बहुत ही ख़ास महत्व होता है। वही कुवांरी कन्यायें हरतालिका तीज व्रत सुयोग्य और मनचाहा वर प्राप्ति के लिए करती हैं। इस व्रत धार्मिक मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए उपवास रखा था और यह दिन उनके मिलन का प्रतीक है। इस व्रत में वे भगवान शिव और माता पार्वती की विधि –विधान से पूजा करती हैं। आइए आपको बताते हैं किस विधि-विधान से हरितालिका तीज व्रत में पूजा करते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हर साल हरतालिका तीज मनाया जाता है। वहीं इस साल यह व्रत 30 अगस्त यानी कल होगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निराहार और निर्जला उपवास रखती हैं। साथ ही इस दिन सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा अर्चना करती हैं और उन्हें 16 श्रृंगार की चीजों के साथ अन्य वस्तुएं अर्पित करती हैं।

पूजन सामग्री:

हरितालिका व्रत में भगवान को अर्पित करने के लिए पूजा में सुहाग का पिटारा तैयार करने के लिए सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, काजल। साथ ही तुलसी, केला का पत्ता, मंजरी, शमी पत्र, जनैऊ, वस्त्र, फूल, अबीर, वस्त्र, फल, कुमकुम, चंदन, घी-तेल, दीपक, नारियल, माता की चुनरी, लकड़ी का पाटा, पीला कपड़ा, आदि।

हरितालिका तीज व्रत नियम:

हरतालिका तीज व्रत में सुहागन महिलाएं पूरे दिन निर्जला और निराहार रहकर उपवास रखती है। वहीं कुछ जगहों पर महिलाएं पूजा के लिए माता पार्वती, भगवान शिव व श्रीगणेश की मिट्टी से प्रतिमा बनाती हैं। फिर शाम को सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर माता पार्वती व भोलेनाथ की विधि पूर्वक पूजा अर्चना करती है। उसके बाद हरतालिका तीज व्रत का पारण चतुर्थी तिथि में ही किया जाता है। इसके अलावा उपवास रखने वाली महिलाओं को हरतालिका तीज व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।

 

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