यहां एक ‘उल्लू’ का विधि-विधान के साथ क‍िया गया अंति‍म संस्‍कार

न्यूज डेस्क — बिहार के सुपौल जिले के कर्णपुर गांव में पिछले दिनों एक उल्‍लू का भव्‍य अतिम संस्‍कार किया गया। इसके साथ ही बड़े स्‍‍तर पर ब्रह्मभोज भोज आयोजि‍त कर प्रसाद भी बांटा। दरसल इस क्षेत्र में स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में एक उल्‍लू घायल अवस्‍था में म‍िला था। ग्रामीणों ने उसे उठाकर उसका इलाज कराया। लेकिन इसके बाद भी उसकी जान नहीं बची। इसके बाद ग्रामीणों ने उसका विधि-विधान के साथ अंति‍म संस्‍कार करने का निर्णय क‍िया क्‍योंकि‍ उल्लू देवी लक्ष्मी का वाहक माना जाता है। उल्लू के शव को नववस्त्र में लपेटकर रखा गया। बड़ी संख्‍या

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February 21, 2018

न्यूज डेस्क — बिहार के सुपौल जिले के कर्णपुर गांव में पिछले दिनों एक उल्‍लू का भव्‍य अतिम संस्‍कार किया गया। इसके साथ ही बड़े स्‍‍तर पर ब्रह्मभोज भोज आयोजि‍त कर प्रसाद भी बांटा। दरसल इस क्षेत्र में स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में एक उल्‍लू घायल अवस्‍था में म‍िला था।

ग्रामीणों ने उसे उठाकर उसका इलाज कराया। लेकिन इसके बाद भी उसकी जान नहीं बची। इसके बाद ग्रामीणों ने उसका विधि-विधान के साथ अंति‍म संस्‍कार करने का निर्णय क‍िया क्‍योंकि‍ उल्लू देवी लक्ष्मी का वाहक माना जाता है। उल्लू के शव को नववस्त्र में लपेटकर रखा गया। बड़ी संख्‍या में लोग उसके अंत‍िम दर्शन क‍रने के ल‍िए पहुंचे थे। इसके बाद मंदिर परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार किया।

इतना ही नहीं इसके बाद उल्‍लू का श्राद्धकर्म करने का न‍िर्णय ल‍िया गया। पूरे गांव से इसके लिए एक बड़ी राशि एकत्रित की गई थी, और मंदिर परिसर में ही कुंवारी कन्याओं का भोजन कराया गया। इसके साथ ही सामूहिक भोज का आयोजन‍ हुआ, ज‍िसमें बड़ी संख्‍या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण क‍िया। कर्णपुर गांव के लोगों का यह काम आस-पास के इलाकों में चर्चा में बना है। बता दें क‍ि इसके पहले इस गांव के लोग दूसरे जीवों की मौत पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोज‍ित कर चुके हैं। यहां के लोग घायल जीवों का इलाज कर उन्‍हें नया जीवन देने की पूरी कोशि‍श करते हैं।