सपा दफ्तर के बाहर लगा माया-अखिलेश का ये पोस्टर बना कौतूहल का केंद्र

लखनऊ — उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए लोकसभा उपचुनाव की दो सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन की मिली जीत के बाद शुक्रवार को लखनऊ के समाजवार्दी पार्टी के मुख्यालय पर अखिलेश और मायावती का एक पोस्टर लगा हुआ है जो कौतूहल का विषय बन गया है. दरअसल इस पोस्टर को सपा कार्यकर्ता तारिक अहमद लारी ने लगाया है,जिसमें जीत के लिए गोरखपुर और फूलपुर की जनता को धन्यवाद दिया गया है. वहीं पोस्टर जारी होने के बाद विपक्षी पार्टियों में गहमागहमी तेज हो गई है.  बता दें कि उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में समीकरण

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March 16, 2018

लखनऊ — उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए लोकसभा उपचुनाव की दो सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन की मिली जीत के बाद शुक्रवार को लखनऊ के समाजवार्दी पार्टी के मुख्यालय पर अखिलेश और मायावती का एक पोस्टर लगा हुआ है जो कौतूहल का विषय बन गया है.

दरअसल इस पोस्टर को सपा कार्यकर्ता तारिक अहमद लारी ने लगाया है,जिसमें जीत के लिए गोरखपुर और फूलपुर की जनता को धन्यवाद दिया गया है. वहीं पोस्टर जारी होने के बाद विपक्षी पार्टियों में गहमागहमी तेज हो गई है. 

बता दें कि उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में समीकरण इस तरीके से बदला कि बुधवार को हुई मतगणना में सपा ने फूलपुर लोकसभा सीट और गोरखपुर लोकसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. फूलपुर में सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल ने बीजेपी प्रत्याशी कौशलेंद्र सिंह पटेल को 59,613 वोटों से हराया.वहीं, गोरखपुर में भी सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21,000 वोटों से हराया. गोरखपुर सीट पर पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपूर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कब्जा था.

अखिलेश-मायावती की मुलाकात में दिखी थी गर्मजोशी

बता दें कि जैसे ही अखिलेश यादव मायावती से मिलने के लिए निकले, बसपा सुप्रीमो के घर से एक गाड़ी उनकी अगवानी के लिए भी पहुंची. यूपी की राजनीति में इन दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद अहम है. क्योंकि इसी मुलाकात से 2019 के लिए रास्ता निकलेगा.

गौरतलब है कि भाजपा की हार की प्रमुख वजह अति आत्मविश्वास, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कम मतदान  मानी जा रही हैं, लेकिन वोटबैंक पॉलिटिक्स में ओबीसी और दलित वोटों को लेकर पर्याप्त नेतृत्व न देना बीजेपी संगठन पर भारी पड़ा है. ऐसे में केंद्र से लेकर राज्य में इस वर्ग के नेताओं को तरजीह देने की अटकलें तेज हो गई हैं.

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