मशहूर पॉप स्टार जस्टिन बीबर को हुई अजीबोगरीब बीमारी, आधा चेहरा हुआ पैरालाइज

मशहूर पॉप स्टार जस्टिन बीबर का नाम तो आपने जरूर सुना होगा, पिछले कई सालों से वो अपनी गायकी के जरिए काफी शोहरत पा चुके हैं, लेकिन अब वो इस खतरनाक बीमारी की गिरफ्त में हैं. बीबर ने 11 जून को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें अगला शो इसलिए कैंसिल

Written By :

SK Sharma

Updated

June 11, 2022

मशहूर पॉप स्टार जस्टिन बीबर का नाम तो आपने जरूर सुना होगा, पिछले कई सालों से वो अपनी गायकी के जरिए काफी शोहरत पा चुके हैं, लेकिन अब वो इस खतरनाक बीमारी की गिरफ्त में हैं. बीबर ने 11 जून को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें अगला शो इसलिए कैंसिल करना पड़ा क्योंकि वो रामसे हंट सिंड्रोम (Ramsay Hunt Syndrome) नामक बीमारी के शिकार हो गए हैं जिसमें उनके चेहरे का करीब आधा हिस्सा लकवे का शिकार हो गया है.

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कैनेडियन सिंगर जस्टिन बीबर ने कहा, ‘जो लोग मेरे अगले शो के कैंसिल होने से निराश हैं, उन्हें बता दूं कि मैं शारीरिक और जाहिर तौर पर इसे परफॉर्म करने की हालत में नहीं हूं.’ बीबर में अपने चेहरे की तरह इशारा करते हुए कहा, ये बेहद गंभीर है, जैसा कि आपको नजर आ रहा हैं. काश ऐसा नहीं होता लेकिन ये साफ है है, मेरी बॉडी मुझे बता रही है कि मुझे थोड़ा रुकना है. मुझे उम्मीद है कि आप लोग समझे. मैं इस वक्त का इस्तेमाल सिर्फ आराम करने और सौ फीसदी एनर्जी के साथ वापस आने के लिए करूंगा जिससे मैं वो कर सकूं जिसके के लिए मैंने जन्म लिया है.’

Justin Bieber

जस्टिन बीबर को रामसे हंट सिंड्रोम नाम की बीमारी

जस्टिन बीबर को रामसे हंट सिंड्रोम नाम की बीमारी है वो एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो वारिसेला जोस्टर वायरस की वजह से होता है. इसी वायरस के कारण हरपेस जोस्टर और चिकन पॉक्स बीमारी होती है. अमेरिका के नेशनल ऑर्गेनाइजेश फॉर रेयर डिसॉर्डर ने बताया, ‘ये वायरस उस इंसान के शरीर में डॉरमेंट रह सकता है जिसे बचपन में चिकन पॉक्स हुआ हो. इस बात को यकीन से नहीं कहा जा सकता कि रामसे हंट सिंड्रोम में वायरस कैसे रिएक्टिवेट हो जाता है.’

 Justin Bieber

रामसे हंट सिंड्रोम की वजह से कान, जुबान और मुंह का उपरी हिस्से में रैशेज हो जाता है, साथ ही कान और सिर में तेज दर्द हो सकता है. इस बीमारी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, एमआर आई और स्किन टेस्ट किया जाता है. कुछ साथ स्थिति में स्पाइनल टैप की विधि अपनाई जा सकती है, इसमें स्पाइनल कैनाल में सुई के जरिए सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूड (Cerebrospinal Fluid) निकालकर टेस्ट किया जाता है.