मां ने खेतों में काम कर तीनों बेटियों को बनाया अफसर

जयपुर — कहते है दिल में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आती है। इस बात को सच कर दिखाया है।जयपुर की इन बेटियों ने।इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वह बेटों से कम नहीं हैं। ये कहानी है ऐसी ही तीन योग्य बेटियों की जिन्होंने पिता की मौत के बाद उनके सपने को ही अपनी जिंदगी बना लिया। नतीजा ये रहा कि तीनों बेटियों ने एक साथ प्रशासनिक अधिकारी बन ना केवल अपने परिवार बल्कि प्रदेश का भी मान बढ़ाया है।दरअसल, ये कहानी है जयपुर जिले के सारंग का बास

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November 24, 2017

जयपुर — कहते है दिल में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आती है। इस बात को सच कर दिखाया है।जयपुर की इन बेटियों ने।इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वह बेटों से कम नहीं हैं। ये कहानी है ऐसी ही तीन योग्य बेटियों की जिन्होंने पिता की मौत के बाद उनके सपने को ही अपनी जिंदगी बना लिया।

नतीजा ये रहा कि तीनों बेटियों ने एक साथ प्रशासनिक अधिकारी बन ना केवल अपने परिवार बल्कि प्रदेश का भी मान बढ़ाया है।दरअसल, ये कहानी है जयपुर जिले के सारंग का बास गांव की जहां 55 वर्षीय मीरा देवी की तीन बेटियों कमला चौधरी, ममता चौधरी और गीता चौधरी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस ) परीक्षा में सफलता हासिल की है।

बेटियों की परीक्षा की तैयारी में घरेलू परिस्थितियां बीच में रोड़ा ना बने इसके लिए बुजुर्ग मां और भाई राम सिंह ने खेतों में काम करना शुरू कर दिया। नतीजा ये रहा कि परिवार की तीनों बेटियों ने आरएएस परीक्षा उत्तीर्ण की। तीनों बहनों में सबसे बड़ी कमला को ओबीसी रैंक में 32वां स्थान मिला, वहीं गीता को 64वां और ममता को 128वां स्थान मिला।

 वहीं मां का कहना है कि उनके पिता का सपना था कि बचपन से ही पढ़ाई में होशियार रही बेटियां अफसर बनें। इसी बीच पिता गोपाल का बीमारी से देहान्त हो गया लेकिन बेटियों ने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए दिन मेहनत की।हालांकि, राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं में आने के बाद भी राजस्थान की ये तीनों बेटियां अभी संतुष्ट नहीं हैं। तीनों ही भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस में जाना चाहती हैं। इस सफलता के बाद भी तीनों बेटियां फिलहाल दिल्ली में रहकर आईएएस में सफलता के लिए पढ़ाई कर रहीं हैं।