रहस्यमयी गांव जहां 12 साल की उम्र में लड़कियां बन जाती हैं लड़का, वैज्ञानिक भी हैरान…

12 वर्ष की उम्र में प्रवेश करते ही लड़कियां लड़का बन जाती है. चौकिए नहीं ये सच है. ला सेलिनास नाम के इस गांव को लोग श्रापित गांव मानते हैं. जबकि वैज्ञानिक भी हैरान है.

Written By :

SK Sharma

Updated

December 13, 2020

आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां के लोगों का जेंडर बड़े होने पर बदल जाता है! आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे है जहां 12 वर्ष की उम्र में प्रवेश करते ही लड़कियां लड़का बन जाती है. चौकिए नहीं ये सच है. ला सेलिनास नाम के इस गांव को लोग श्रापित गांव मानते हैं. जबकि वैज्ञानिक भी हैरान है.

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रहस्यमयी गांव का राज…

बता दें कि डोमिनिकल रिपब्लिक में ला सेलिनास नाम के इस गांव की लड़कियां 12 साल की उम्र में लड़का बन जाती है. इस गांव की जनसंख्या महज 6 हजार है, लेकिन फिर भी यह छोटा सा गांव दुनिया के शोधकर्ताओं के लिए शोध का विषय बना हुआ है. जबकि वर्ल्ड मैप में इस गांव की पहचान एक रहस्यमयी गांव के तौर पर की जाती है.

एक रहस्यमयी

वहीं स्‍थानीय लोगों का मानना है कि गांव पर किसी अदृश्य शक्ति का साया है, वहीं कुछ लोग गांव को शापित मानते हैं. इस गांव में सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां पैदा तो लड़कियां होती हैं. जब वो 12 साल की होती हैं तो वह लड़का बन जाती है.

किन्नर कह के पुकारते हैं लोग

जेंडर बदलने की इस की इस बीमारी से गांव के लोग बेहद परेशान हैं. इस गांव में जब भी किसी परिवार में लड़की का जन्म होता है तो परिवार में उदासी छा जाती है. क्योंकि उन्हें पता होता है कि बड़ी होने पर वह लड़की, लड़का बन जाएगी.

इस वजह से गांव में लड़कियों की संख्या भी अब कम हो गई है. बीमारी से पीड़ित इन बच्चों को बुरी नजर से देखा जाता है. ऐसे बच्‍चों को ‘ग्वेदोचे’ के नाम से बुलाया जाता है. लोकल भाषा में ‘ग्वेदोचे’ शब्द का मतलब किन्नर होता है. दरअसल ये बीमारी एक आनुवंशिक विकार है और इससे ग्रस्‍त बच्‍चों को ‘सूडोहर्माफ्रडाइट’ कहते हैं.

रहस्यमयी गांव

शोधकर्ता भी हैरान…

गौरतलब है कि इस बीमारी में लड़की के रूप में पैदा हुए कुछ बच्चों के शरीर में खास उम्र के बाद धीरे-धीरे पुरुषों जैसे अंग बनने लगते हैं. उनकी आवाज भी बदलने लग जाती है. उनके शरीर में लड़कियों से लड़कों वाले बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. कई शोधकर्ताओं ने इस बीमारी का उपचार खोजने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके. शोध कहता है कि इस गांव में 90 में से एक बच्चा इस बीमारी से जूझ रहा है.

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