Mainpuri By-Election: मैनपुरी में मुलायम की विरासत बचाने उतरीं बहू डिंपल यादव

सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में पारिवारिक विरासत बचाने के लिए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को मैदान में उतारा है. उन्होंने डिंपल यादव को चुनावी मैदान में उतार कर धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव की होड़

Written By :

SK Sharma

Updated

November 11, 2022

सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में पारिवारिक विरासत बचाने के लिए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को मैदान में उतारा है. उन्होंने डिंपल यादव को चुनावी मैदान में उतार कर धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव की होड़ को खत्म करने की कोशिश की है. हालांकि यहां पर चुनावी समीकरण डिंपल के फेवर में बैठ पाएगा या नहीं, यह मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव के रुख पर काफी हद तक निर्भर करेगा.

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मैनपुरी सीट पर 26 साल से सपा कब्जा

राजीतिक पंडितों की मानें तो सपा मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का परिवार 26 साल से इस सीट पर काबिज रहा है. उन्हें लगता है कि उनके इस फैसले से मुलायम की मौत से लोगों में उपजी सहानुभूति के अलावा महिलाओं का भी भरपूर समर्थन मिलेगा. सपा के एक स्थानीय नेता ने बताया कि सपा के बाद दूसरा कोई भी दल इस गढ़ को फतेह नहीं कर सका.

मैनपुर में शिवपाल की पकड़ मजबूत

उन्होंने कहा कि इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, फिरोजाबाद और फरुर्खाबाद जैसे जिले सपा के गढ़ माने जाते हैं. यादवों की बड़ी आबादी के समर्थन से अधिकतर सीटों पर साइकिल का कब्जा होता रहा है. यादव बेल्ट पर शिवपाल यादव की भी पकड़ बेहद मजबूत है. उन्होंने दशकों तक इन इलाकों में गांव-गांव घूमकर काम किया है. शिवपाल यादव (Shivpal Singh Yadav) का यहां के बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध बताया जाता है. इसी कारण मैनपुरी सीट पर शिवपाल का काफी असर रहेगा. इसलिए अखिलेश को उन्हें साधना ही पड़ेगा.

मुलायम के सामने नहीं उतारा था उम्मीदवार

वर्ष 2018 में पारिवारिक मतभेदों के चलते जब मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव (Shivpal Singh Yadav) ने प्रसपा का गठन कर सियासत की नई राह चुन ली. इसके बाद भी शिवपाल सिंह ने वर्ष 2019 के चुनाव में मुलायम सिंह यादव के सामने प्रसपा का प्रत्याशी उतारने से साफ मना कर दिया था. ऐसा करके उन्होंने जता दिया था कि उनके लिए बड़े भाई का सम्मान पहले है और पार्टी बाद में.

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