किशोरों की स्वास्थ्यगत समस्याओं के लिए “साथिया केंद्र” को किया गया लांच

सीतापुर–किशोर/किशोरियों की स्वास्थ्यगत समस्याओं को सुचारपूर्वक निदान किए जाने की दिशा में प्रथम चरण में प्रदेश के 344 एडोलसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिकों का पुनरुद्धार स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तरप्रदेश द्वारा किया जा रहा है। होटल हिल्टन गार्डेन इन, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ में प्रदेश सरकार चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित प्रदेश के 57 जनपदों में चिन्हित स्वास्थ्य इकाइयों में से प्रथम माडल एडोलसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक सीतापुर जनपद के मिश्रिख विकासखंड में “साथिया केंद्र” का ई-लाँच किया। इस केंद्र को प्रदेश सरकार द्वारा पापुलेशन

Written By :

Shweta Singh

Updated

December 19, 2019

सीतापुर–किशोर/किशोरियों की स्वास्थ्यगत समस्याओं को सुचारपूर्वक निदान किए जाने की दिशा में प्रथम चरण में प्रदेश के 344 एडोलसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिकों का पुनरुद्धार स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तरप्रदेश द्वारा किया जा रहा है।

होटल हिल्टन गार्डेन इन, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ में प्रदेश सरकार चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित प्रदेश के 57 जनपदों में चिन्हित स्वास्थ्य इकाइयों में से प्रथम माडल एडोलसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक सीतापुर जनपद के मिश्रिख विकासखंड में “साथिया केंद्र” का ई-लाँच किया। इस केंद्र को प्रदेश सरकार द्वारा पापुलेशन फाउंडेशन आफ इंडिया और चिल्डरेंस इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री जय प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज भारत की जनसंख्या का सबसे बड़ा भाग युवा और किशोर है। जनगणना 2011 के अनुसार प्रत्येक पाँचवा व्यक्ति किशोर वय में है। उत्तर प्रदेश की आबादी का चैबीस प्रतिशत भाग 10 से 19 वर्ष के आयु वर्ग के किशोर/किशोरियों का है। किशोरों का यह बड़ा जनसांख्यिकीय भाग राज्य के लिए आर्थिक विकास में तेजी लाने और गरीबी को कम करने की दिशा में एक अभूतपूर्व अवसर साबित हो सकता है। किशोरों की क्षमता संवर्धन और सक्षम बनाने के लिए, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और अन्य क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश किया जाना चाहिए।

इस परियोजना के बारे में देवेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने कहा कि आरकेएसके के तहत किशोर स्वास्थ्य (एएच) की रणनीति के तहत 10-14 साल और 15-19 साल के शहरी और ग्रामीणय स्कूल में और स्कूल से बाहरय विवाहित और अविवाहित और कमजोर और कम सेवा वाले समस्त किशोरध्किशोरी वर्ग को अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति करना है।