राजा भैया की रैली में 3 हजार बसें 7 हजार चार पहिया वाहनों से पहुंचे समर्थक

लखनऊ —  अपने सियासी सफर के 25 साल पूरे होने पर राजा भैया की राजधानी लखनऊ रमाबाई आंबेडकर मैदान में की गई रैली कई मायनों में सफल रही। मायावती के बाद लखनऊ के रमाबाई पार्क में यह सबसे बड़ी रैली रही। राजा भैया की रैली में लाखों समर्थक पहुंचे।एक अनुमान के मुताबिक यह भीड़ दो लाख के करीब थी। इस दौरान पूर्व मंत्री व कुंडा के निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने इस रैली को रजत जयंती समारोह नाम दिया। राजाभैया के शक्ति प्रदर्शन के लिए जिले से 3 हजार बसें आईं थी। वहीं लगभग 7 हजार चार

Written By :

admin

Updated

November 30, 2018

लखनऊ —  अपने सियासी सफर के 25 साल पूरे होने पर राजा भैया की राजधानी लखनऊ रमाबाई आंबेडकर मैदान में की गई रैली कई मायनों में सफल रही।

मायावती के बाद लखनऊ के रमाबाई पार्क में यह सबसे बड़ी रैली रही। राजा भैया की रैली में लाखों समर्थक पहुंचे।एक अनुमान के मुताबिक यह भीड़ दो लाख के करीब थी।

इस दौरान पूर्व मंत्री व कुंडा के निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने इस रैली को रजत जयंती समारोह नाम दिया। राजाभैया के शक्ति प्रदर्शन के लिए जिले से 3 हजार बसें आईं थी। वहीं लगभग 7 हजार चार पहिया वाहनों से भी समर्थकों ने समारोह में शिरकत की। कुंडा व बाबागंज के लोगों के लिए स्पेशल ट्रेन भी गढ़ी मानिकपुर से रवाना हुई थी। 

वहीं एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह ‘गोपालजी’ के प्रतिनिधि अनिल कुमार सिंह लाल साहब ने बताया कि कुुंडा व बाबागंज से अधिक भीड़ रजत जयंती में शामिल हुई। कुंडा व बाबागंज विधानसभा के समर्थकों को लेकर 25 सौ बसें गईं थी। जबकि दोनों विधानसभा से 5 हजार से अधिक चार पहिया लेकर समर्थक रवाना हुए थे। भीड़ को देखते समर्थकों के लिए गढ़ी मानिकपुर से 18 बोगियों की स्पेशल ट्रेन 30 नवंबर की सुबह 8:30 बजे लखनऊ के लिए रवाना हुई।

रजत जयंती समारोह को कामयाब बनाने के लिए राजाभैया समर्थक प्रधान, बीडीसी सदस्य, ब्लाक प्रमुख, पूर्व ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्यों को लगाया गया था। जो लगातार मेहनत कर अपने इलाके के लोगों को समारोह में शामिल होने के लिए तैयार कर के लाये थे। जिले की भीड़ पर दूसरे जिलों के लोगों की निगाहें टिकी हुई थी। राजा भैया ने 26 साल की उम्र में 1993 में पहली बार कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद से वह कभी भी हारे नहीं।