प्रेरणा बनीं 79 साल की रिटायर्ड प्रोफेसर, जिसने जिंदगी भर नहीं किया बिजली का इस्तेमाल

पुणे–देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती है। लेकिन पुणे में रहने वाली 79 साल की डॉक्टर हेमा साने उपलब्धता के बाद भी बिजली का इस्तेमाल नहीं करतीं।  वे जिस घर में रहती हैं उसमें आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने फैसला किया है कि आगे भी वो बिना बिजली के जिंदगी गुजारेंगी। डॉक्टर हेमा साने ने इसके पीछे की वजह भी बताई। इसलिए नहीं करतीं बिजली का इस्तेमालः डॉ. हेमा साने ने बिजली का इस्तेमाल न करने के पीछे का कारण प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपना प्रेम बताया। डॉक्टर

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May 8, 2019

पुणे–देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती है। लेकिन पुणे में रहने वाली 79 साल की डॉक्टर हेमा साने उपलब्धता के बाद भी बिजली का इस्तेमाल नहीं करतीं। 

वे जिस घर में रहती हैं उसमें आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने फैसला किया है कि आगे भी वो बिना बिजली के जिंदगी गुजारेंगी। डॉक्टर हेमा साने ने इसके पीछे की वजह भी बताई।

इसलिए नहीं करतीं बिजली का इस्तेमालः

डॉ. हेमा साने ने बिजली का इस्तेमाल न करने के पीछे का कारण प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपना प्रेम बताया। डॉक्टर हेमा साने के मुताबिक, “मैंने अपने पूरे जीवन में कभी बिजली की जरूरत महसूस नहीं की। लोग अक्सर पूछते हैं कि आप बिना बिजली के कैसे रहती हैं और मैं उनसे पूछती हूं कि आप बिजली के साथ कैसे रहते हैं?”

डॉ. हेमा ने कहा, “ये पक्षी मेरे दोस्त हैं और जब भी मैं अपने घर का काम करती हूं तो वे आते हैं। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आप इस घर को क्यों नहीं बेचती, आपको इतने पैसे मिलेंगे। मैं हमेशा कहती हूं कि इन पेड़ों और पक्षियों की देखभाल कौन करेगा?

डॉ. हेमा के अनुसार, “खाना, घर और कपड़े जिंदगी जीने के लिए बुनियादी जरूरतें हैं। बिजली नहीं। लोग मुझे मूर्ख कहते हैं। मैं पागल हो सकती हूं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि यह मेरा जीवन जीने का तरीका है। मैं जैसे चाहती हूं वैसे रह सकती हूं।” डॉ. हेमा साने ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है। कई सालों तक गरवारे कॉलेज पुणे में प्रोफेसर भी रहीं। उन्होंने वनस्पति विज्ञान और पर्यावरण पर कई किताबें लिखी हैं। आज भी जब वे घर में अकेली होती हैं तो नई किताबें लिखती रहती हैं।

वे पुणे के बुधवार पेठ इलाके में एक छोटी सी झोपड़ी में रहती हैं। उनका घर कई तरह के पेड़ों और पक्षियों से घिरा है। उनकी सुबह पक्षियों के चहचहाने से होती है और घर को रोशनी देने वाले चमकदार लैंप के साथ खत्म होती है।