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1980 से अब तक लगातार एटा का ये 'पागल' गांधी लोगों के लिए लड़ रहा है जंग...

खास चेहरा
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एटा--अपने लिए जिये तो क्या जिये, इंसान वो जो दूसरों के लिए जिये । एटा में एक ऐसे ही गॉंधी है जिन्होंने दूसरों की खातिर अपना पूरा जीवन गुजार दिया है और खुद गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 70 साल के दयाराम पागल आज भी उम्र के अंतिम पड़ाव पर जिलाधिकारी कार्यालय स्थित धरना स्थल पर पिछले दो दिनों से धरना दे रहे है ताकि उनके क्षेत्र के लोग खुशहाली भरा जीवन जी सके। 

एटा--अपने लिए जिये तो क्या जिये, इंसान वो जो दूसरों के लिए जिये । एटा में एक ऐसे ही गॉंधी है जिन्होंने दूसरों की खातिर अपना पूरा जीवन गुजार दिया है और खुद गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 70 साल के दयाराम पागल आज भी उम्र के अंतिम पड़ाव पर जिलाधिकारी कार्यालय स्थित धरना स्थल पर पिछले दो दिनों से धरना दे रहे है ताकि उनके क्षेत्र के लोग खुशहाली भरा जीवन जी सके। 

35 साल से गॉंधीवादी मूल्यों और आदर्शों के साथ जीने वाले दयाराम पागल नाकारा प्रशासन से अकेले ही जूझ रहे है सिर्फ इसलिए कि 20 लाख की आबादी वाले क्षेत्र को खारे पानी से मुक्ति मिल सके और लोग खेती बाड़ी कर अपना जीवन खुशहाल कर सके लेकिन भ्रष्ट प्रशासन ने अब तक उनकी कोई सुध नहीं ली है। अब दयाराम पागल ने मीडिया के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ जी से फरियाद की है ।

दयाराम पागल जलेसर तहसील के नगला मीरा के रहने वाले है। गॉधी जी के आर्दशों और मूल्यों से प्रभावित दयाराम पिछले 35 साल से समाजसेवा के क्षेत्र में गुमनाम रहते हुए भी लोगों के लिए एक लम्बी लड़ाई लड़ रहे है। कई असाध्य बीमारियों के बाद जहॉं लोग बिस्तर पर आराम करते है वहीं दयाराम अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी वो समाज और लोगों की लड़ाई लड़ रहे है ताकि लोगों को खारे पानी से मुक्ति मिल सके। जलेसर क्षेत्र के 60 किमी के दायरे में 20 लाख से ज्यादा लोग खारे पानी की विकट समस्या से जूझ रहे है। खारे पानी के चलते जहॉं कृषि योग्य भूमि बंजर हो गयी है लोग और पशु पक्षी और जानवर तक जिस पानी को नहीं पी सकते उसे मजबूरन जिंदा इंसान पीने को मजबूर है, और गम्भीर बीमारियों को गले लगाकर स्लो पोइजन लेने को मजबूर है इसी बात से दयाराम पागल काफी परेशान नजर आते है।

दयाराम ने 1980 से लोगों की परेशानी और समस्याओं को अपना समझकर हर पल उनके साथ खड़े रहे। शायद यही वजह है कि आज पूरे क्षेत्र में दयाराम पागल को लोग एटा का गांधी कहते है। खारे पानी की समस्या को लेकर 1980 से उनकी ये लड़ाई लगातार जारी है। दयाराम 2 जून 1983 को प्रदेश के तत्कालीन सिंचाई मंत्री वीर बहादुर सिंह से मिले और खारे पानी की समस्या से उन्हें अवगत कराया। सिचाई मंत्री के आदेश पर पानी के नमूने लिये गये जो बेहद चौकाने वाले थे और उन्हें तब लगा कि उनका ये प्रयास रंग लाएगा लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से समस्या ज्यों की त्यों बनी रही। ऐसा नहीं है कि समस्या का कोई हल नहीं है। दयाराम का कहना है कि जलेसर के 60 किमी क्षेत्र में रजवाहे है और यदि नहरों से गंगा के पानी को उसमें छोड़ दिया जाये तो किसान खेती आसानी से कर सकेगें और एक बहुत बड़ा भूभाग खेती का बंजर होने से बच सकेगा। समस्या को लेकर दयाराम पागल उत्तर प्रदेश के मौजूदा गर्वनर राम नाईक से भी मिले और करीब 41 मिनट तक इस मसले पर उनकी उनसे बातचीत भी हुई और उन्हें समस्या के निदान का आश्वासन भी दिया गया।

(रिपोर्ट-आर.बी.द्विवेदी,एटा)

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